मंदिर श्री सीताराम जी में भागवत कथा का आयोजन, राम जन्म महोत्सव धूमधाम से मनाया

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Shri Ram Katha:
Shri Ram Katha: "Shabari represents the pinnacle of devotion; today's human lacks patience" – Akinchan Maharaj.

जयपुर। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर छोटी चौपड़ स्थित मंदिर श्री सीताराम जी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा का वाचन प्रसिद्ध कथावाचक आशीष महाराज द्वारा किया जा रहा है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन सुबह और शाम कथा का आयोजन हो रहा है। बताया गया कि आशीष महाराज के परिवार की चार पीढ़ियां रामकथा, भागवत कथा एवं शिवपुराण का वाचन करती आ रही हैं।

कथा के सातवें दिन आशीष महाराज ने गोवर्धन धारण और रासलीला प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि भक्त की प्रसन्नता में ही भगवान की प्रसन्नता निहित होती है और गुरु की शरण में जाने से ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने भक्त प्रह्लाद का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान को अपने भक्त की रक्षा के लिए खंभे से भी प्रकट होना पड़ा था।

महाराज ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को बचपन और युवावस्था से ही भगवान की भक्ति शुरू कर देनी चाहिए, क्योंकि वृद्धावस्था में शरीर और इंद्रियां कमजोर हो जाती हैं तथा विभिन्न बीमारियों के कारण नियमित भजन-पूजन करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन में अभिमान नहीं करना चाहिए।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राजा दक्ष प्रजापति के अहंकार को भगवान शंकर ने समाप्त किया था। प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में भगवान का वास है, इसलिए सभी से प्रेम और सद्भाव रखना चाहिए।

कथा के दौरान 121 पोथियों का पाठ भी किया गया। श्रद्धालुओं के लिए कथा मंडप को आकर्षक रूप से सजाया गया है। गर्मी को देखते हुए पंखे, कूलर एवं ठंडे पानी की विशेष व्यवस्था की गई है।

कथा के बीच राम जन्म महोत्सव भी बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की झांकी सजाई गई और श्रद्धालुओं को मिठाई, फल, टॉफियां एवं वस्त्र वितरित कर बधाई दी गई।

मंदिर से जुड़े रामबाबू झालानी ने बताया कि भागवत कथा का आयोजन 15 जून तक प्रतिदिन सुबह 10 से 12 बजे तथा शाम 4 से 6 बजे तक किया जाएगा। कथा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई तथा पोथी आचार्यों का माला, दुपट्टा और भेंट देकर सम्मान किया गया।

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