जयपुर। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी के अवसर पर शुक्रवार को छोटी काशी जयपुर के मंदिरों और घरों में श्रद्धा व भक्ति का अनूठा माहौल देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था के साथ सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा-अर्चना की।
एकादशी के मौके पर शहर के खाटूश्यामजी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा।
इस विशेष अवसर पर बाबा श्याम का अलौकिक शृंगार किया गया। मंदिरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते नजर आए। वहीं, अन्य ठाकुरजी मंदिरों में विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा का पाठ हुआ और श्रद्धालुओं को योगिनी एकादशी व्रत कथा का श्रवण कराया गया।
पंचांग और तिथियों के फेर के चलते इस बार योगिनी एकादशी का व्रत दो दिन रखा जा रहा है। गृहस्थ जीवन वाले और स्मार्त संप्रदाय के साधकों ने शुक्रवार को श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर भगवान विष्णु का स्मरण किया। श्रद्धालुओं ने दिनभर उपवास रख परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति और जगत कल्याण की कामना की। दूसरी ओर, वैष्णव संप्रदाय के साधक उदया तिथि एवं द्वादशी युक्त एकादशी के आधार पर शनिवार को व्रत रखेंगे।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शनिवार को व्रत रखने वाले साधकों को विशेष फल की प्राप्ति होगी, क्योंकि इस दिन त्रिपुष्कर योग और अमृत सर्वार्थ सिद्धि योग का बेहद शुभ संयोग बन रहा है। इस दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पीले पुष्प, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करने का विधान है। एकादशी व्रत के दौरान चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है।
धार्मिक ग्रंथों के हवाले से योगिनी एकादशी का महत्व बताते हुए पंडितों ने कहा कि सनातन धर्म में यह एकादशी अत्यंत पुण्यदायी और समस्त पापों का नाश करने वाली मानी गई है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस एकादशी का व्रत व पूजन करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
इस पावन मौके पर श्रद्धालुओं ने अन्न, फल, वस्त्र और जरूरतमंदों को भोजन कराने का संकल्प लिया। मंदिरों को आकर्षक पुष्प सज्जा से महकाया गया और ठाकुरजी को विभिन्न प्रकार के फल-मिष्ठान व शीतल पेयों का भोग लगाया गया। दिनभर चले सत्संग और भजनों के माध्यम से समाज को धर्म, सेवा, संयम और दान का संदेश दिया गया। अंत में भगवान विष्णु की महाआरती के साथ विश्व कल्याण की प्रार्थना की गई।



















