जयपुर। चार माह का प्रमुख धार्मिक पर्व चातुर्मास 26 जुलाई(रविवार) से शुरू होने जा रहे है। वर्षा ऋतु के दौरान आचार्य, मुनि और आर्यिकाएं एक ही स्थान पर विराजमान रहकर प्रवचन, स्वाध्याय, तप, त्याग, संयम और धर्मप्रभावना के माध्यम से समाज को आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा देंगे। इस दौरान मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान, संस्कार शिविर, सामूहिक आराधनाएं, युवा एवं महिला सम्मेलन सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे।
उल्लेखनीय है कि अहिंसा के सिद्धांत के तहत वर्षा ऋतु में सूक्ष्म जीवों की रक्षा के लिए जैन संत विहार नहीं करते और चार माह तक एक स्थान पर रहकर चातुर्मास की मर्यादा का पालन करते हैं। आज के तनावपूर्ण और उपभोक्तावादी दौर में चातुर्मास संयम, आत्मनिरीक्षण, नैतिकता, जीवदया, पर्यावरण संरक्षण और पारिवारिक संस्कारों को मजबूत करने का श्रेष्ठ अवसर है।
यहां होंगे चातुर्मास
राजधानी में आचार्य विशद सागर (चित्रकूट कॉलोनी), आचार्य शशांक सागर (पदमपुरा-बाड़ा), आचार्य आदित्य सागर (जनकपुरी), उपाध्याय ऊर्जयंत सागर (भट्टारक जी की नसियां), मुनि विलोक सागर एवं विभोध सागर (मानसरोवर), मुनि विश्व विजय सागर (मुहाना मंडी) सहित सात गणिनी आर्यिकाओं एवं आर्यिकाओं के ससंघ विभिन्न क्षेत्रों में चातुर्मास करेंगे। इसके अलावा निवाई, चाकसू, बगरू, चौमूं, फागी, जोबनेर, केकड़ी समेत आसपास के नौ स्थानों पर भी दिगंबर जैन संतों का चातुर्मास होगा।
चार माह होंगे धार्मिक आयोजन
चातुर्मास के दौरान अष्टांहिका पर्व, गुरु पूर्णिमा, वीर शासन जयंती, मोक्ष सप्तमी, दशलक्षण महापर्व, अनंत चतुर्दशी, क्षमावाणी पर्व, भगवान महावीर मोक्ष कल्याणक और वीर निर्वाण संवत् के शुभारंभ सहित अनेक प्रमुख धार्मिक पर्व मनाए जाएंगे। इसके साथ ही संतों की जयंती-पुण्यतिथि, धार्मिक संगोष्ठियां, संस्कार शिविर और सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।



















