डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 24 लाख की ठगी करने वाले साइबर गिरोह का पर्दाफाश

0
56

जयपुर। राजधानी जयपुर की श्याम नगर थाना पुलिस और जिला विशेष टीम (डीएसटी) दक्षिण ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में कजाकिस्तान से एमबीबीएस कर चुका गणेश चौधरी और उसके सहयोगी दुष्यंत जांगिड़ शामिल हैं। गिरोह महिला डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 24 लाख रुपए की ठगी करने के मामले में वांछित था।

पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) राजर्षि राज ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी गणेश चौधरी (29) निवासी कोतवाली बाड़मेर हाल वैशाली उत्सव अपार्टमेंट, करणी विहार तथा दुष्यंत जांगिड़ (32) निवासी हसनपुरा सदर हैं। गणेश गिरोह का प्रमुख सदस्य है, जबकि दुष्यंत साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करता था।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 32 डेबिट कार्ड, 12 चेकबुक, 9 पासबुक, 8 सिम कार्ड, 2 रबर स्टाम्प, 5 मोबाइल फोन तथा 1.27 लाख रुपए नकद बरामद किए हैं।

महिला डॉक्टर से 24 लाख की ठगी

सहायक पुलिस आयुक्त (सोडाला) सुनील प्रसाद शर्मा के अनुसार श्याम नगर थाने में 22 दिसंबर 2025 को डॉ. सुरेखा लोबा ने मामला दर्ज कराया था। उन्होंने शिकायत में बताया कि 15 दिसंबर को व्हाट्सएप कॉल और संदेशों के जरिए उन्हें डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया। खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर ठगों ने उन्हें और उनके परिवार को गिरफ्तार करने की धमकी दी तथा भयभीत कर 24 लाख रुपए विभिन्न बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर करवा लिए।

विदेश में पढ़ने वाले छात्रों के खातों का करते थे इस्तेमाल

जांच में सामने आया कि आरोपी विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के बैंक खातों का दुरुपयोग करते थे। इन खातों में ठगी की रकम जमा कर क्रिप्टो करेंसी यूएसडीटी (यूएस डॉलर टेथर) खरीदी जाती थी, जिससे रकम का स्रोत छिपाया जा सके। बाद में यूएसडीटी को ऑनलाइन बेचकर राशि अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी जाती थी।

पुलिस के अनुसार गिरोह के खिलाफ देशभर में साइबर पोर्टल पर 100 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। आरोपियों द्वारा विभिन्न राज्यों में बैंक खाते किराए पर लेकर उनमें ठगी की रकम जमा कराई जाती थी।

कजाकिस्तान से पढ़ाई कर लौटे आरोपी

डीसीपी राजर्षि राज ने बताया कि गणेश चौधरी वर्ष 2021 में कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटा था। उसने सिरोही के सरकारी अस्पताल में इंटर्नशिप भी की। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का फरार मास्टरमाइंड सुनील विश्नोई उर्फ कार्तिक भी कजाकिस्तान से एमबीबीएस कर चुका है।

फर्जी दस्तावेजों से खुलवाए खाते

पुलिस के अनुसार मास्टरमाइंड सुनील विश्नोई फर्जी नाम-पते से आधार कार्ड बनवाकर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाता था। किरायानामों के आधार पर पते बदलकर खोले गए इन खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने में किया जाता था।

तकनीकी जांच से मिली सफलता

सहायक पुलिस आयुक्त (सोडाला) सुनील प्रसाद शर्मा के सुपरविजन में श्याम नगर थानाधिकारी दलबीर सिंह और डीएसटी प्रभारी विशम्भर दयाल के नेतृत्व में गठित टीम ने बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच की। जांच के दौरान दिल्ली के करोल बाग स्थित बैंक खातों की कड़ियां मिलने पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस फरार मास्टरमाइंड सुनील विश्नोई समेत गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। मामले में साइबर अपराध, धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में जांच जारी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here