जयपुर। मंगल विहार स्थित जैन मंदिर में पहली बार पावापुरी तीर्थक्षेत्र की भव्य एवं दिव्य रचना साकार होगी। भगवान महावीर स्वामी के 2553वें निर्वाण महोत्सव के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय ‘अर्हमयी दीपोत्सव’ शनिवार से श्रद्धा और भक्ति के साथ शुरू होगा। महोत्सव 9 नवंबर तक चलेगा। आयोजन का प्रमुख आकर्षण 24 तीर्थंकरों के पावन चरणों की स्थापना और पावापुरी तीर्थक्षेत्र की विशेष संरचना होगी।
मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष अमित गोधा ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक की स्मृति को सजीव किया जाएगा। संपूर्ण आयोजन परम पूज्य सम्यक्त्ववर्धिनी भक्ताम्बर साधिका आर्यिकारत्न 105 अर्हंश्री माताजी, श्रमणी 105 संस्कृतश्री माताजी और श्रमणी 105 अर्हन माताजी के पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद में होगा।
उन्होंने बताया कि महोत्सव के पहले दिन शनिवार को 24 तीर्थंकरों के चरणों की स्थापना, पावापुरी रचना की शुद्धि, विशेष पूजन और भगवान महावीर की महाआरती सहित धार्मिक अनुष्ठान होंगे। दूसरे दिन 8 नवंबर को अभिषेक एवं शांतिधारा, भगवान आदिनाथ पूजन, 24 तीर्थंकर पूजन और गणधर स्वामी पूजन के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं, 9 नवंबर को भगवान महावीर स्वामी की विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, शांतिधारा और अन्य अनुष्ठानों के साथ महोत्सव का समापन होगा।
यह आयोजन अर्हम वर्षायोग समिति 2026, मंगल विहार के तत्वावधान में भगवान आदिनाथ जन कल्याण समिति, श्री आदिनाथ महिला मंडल और केशरी अभिषेक समूह के सहयोग से किया जा रहा है। आयोजन समिति के अनुसार, महोत्सव का उद्देश्य जैन समाज में धर्म, संस्कृति, एकता और आध्यात्मिक चेतना को प्रोत्साहित करना है। समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।

















