जयपुर। आर्ट ऑफ लिविंग के यूथ डेस्क की ओर से आयोजित सातवें नेशनल इंडक्शन प्रोग्राम में 1 हजार 300 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के हजारों प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने गुरुदेव श्रीरवि शंकर से संवाद किया। आईआईटी,आईआईएम,एनआईटी और एम्स सहित विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने सिचुएशनशिप, सोलमेट, ओवरथिंकिंग, अकेलेपन, सोशल मीडिया और एकाग्रता जैसे विषयों पर सवाल पूछे।
सिचुएशनशिप और सोलमेट के सवाल पर गुरुदेव ने युवाओं को दूसरे व्यक्ति के नजरिए से सोचने की सलाह दी। वहीं जीवन में निरर्थकता महसूस होने के सवाल पर उन्होंने श्वास पर ध्यान देने और जीवन में अर्थ व उद्देश्य तलाशने की बात कही।
गुरुदेव ने युवाओं से कहा, “शरारती बने रहिए, यही युवावस्था की पहचान है।” उन्होंने सफलता के लिए आत्मविश्वास, असफलताओं से सीखने और संदेह को अपनी पहचान नहीं बनने देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल दौर में ध्यान की अवधि घटकर करीब 30 सेकंड रह गई है। तनाव कम होने से एकाग्रता स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।
सोशल मीडिया पर उन्होंने युवाओं को फेक न्यूज से सावधान रहने की सलाह दी और कहा कि एआई के दौर में हर ऑनलाइन जानकारी को सच नहीं मानना चाहिए। एफओएमओ पर उन्होंने कहा कि अच्छा मित्र वह है, जिसके साथ बातचीत के बाद व्यक्ति एफओएमओ से बाहर निकल आए। “ज़ोमो में जिएं और दूसरों को एफओएमओ दें” के संदेश के साथ उन्होंने युवाओं को सकारात्मक, तनावमुक्त और आत्मविश्वासी जीवन जीने की प्रेरणा दी।



















