डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग से 2.15 करोड़ की ठगी करने वाले केरल से गिरफ्तार

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Individual who swindled ₹2.15 crore arrested from Kerala
Individual who swindled ₹2.15 crore arrested from Kerala

जयपुर। डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 90 वर्षीय बुजुर्ग से 2 करोड़ 15 लाख रुपए की साइबर ठगी के मामले में ज्योति नगर थाना पुलिस ने अंतरराज्यीय कार्रवाई करते हुए केरल से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने ठगी की रकम अपने बैंक खातों में प्राप्त की और चेक के माध्यम से निकाली। पुलिस ने दोनों को एर्नाकुलम से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लाने के बाद न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया गया है। जिनसे पूछताछ की जा रही है।

उपायुक्त दक्षिण राजर्षि राज के अनुसार परिवादी रविन्द्र सिंह मोहनोत ने ज्योति नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनके 90 वर्षीय मामा गणपत सिंह भंडारी के पास 28 जुलाई 2026 को व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया था। कॉल करने वाले ने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी और खुद को मुंबई से सीबीआई अधिकारी बताया। उसने बुजुर्ग से कहा कि 50 करोड़ रुपए का हवाला लेन-देन पकड़ा गया है और इसमें से कुछ रकम उनके बैंक खाते में आई है।

इसके बाद आरोपियों ने गिरफ्तारी की धमकी देकर बुजुर्ग को डराया और परिवार सहित किसी अन्य व्यक्ति को इसकी जानकारी देने से मना कर दिया। इसी दौरान एक अन्य व्यक्ति ने खुद को आरबीआई का बैंक मैनेजर बताकर कॉल किया और म्यूचुअल फंड से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल कर ली। आरोपियों ने अलग-अलग समय पर बुजुर्ग से विभिन्न बैंक खातों में दो करोड़ रुपए से अधिक की राशि ट्रांसफर करवा ली।

इस संबंध में 12 अगस्त 2026 को ज्योति नगर थाने में प्रकरण दर्ज किया गया। इधर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाधिकारी गुंजन सोनी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम की जांच में सामने आया कि पीड़ित के बैंक खाते से 2 करोड़ 15 लाख रुपए विभिन्न स्तरों पर सैकड़ों बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए।

पुलिस ने संबंधित खातों को डेबिट फ्रीज करवाकर बैंक विवरण खंगाले। जांच के दौरान करीब 70 लाख रुपए के लेन-देन से जुड़े एक आईसीआईसीआई बैंक खाते को चिह्नित किया गया। इस खाते से केरल के दो बैंक खातों में पांच-पांच लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे। पुलिस के अनुसार दोनों खाताधारकों ने यह रकम चेक के माध्यम से निकाली थी। इसी कड़ी में पुलिस ने केरल के एर्नाकुलम से आनंद बाबू (26) निवासी वारापुझा एर्नाकुलम और इबिन बेसिल (31) निवासी एर्नाकुलम को गिरफ्तार किया। पुलिस अब ठगी की रकम के अन्य खातों और गिरोह से जुड़े लोगों के संबंध में जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर ठगी में आरोपियों द्वारा खुद को जांच एजेंसी या बैंक का अधिकारी बताकर लोगों को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया जाता है। खासकर अकेले रहने वाले बुजुर्गों को निशाना बनाकर उन्हें परिजनों से बात नहीं करने दी जाती, ताकि वे डर के कारण किसी से मदद न मांग सकें। पुलिस और भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर इस तरह की ठगी को लेकर जागरूकता संबंधी सलाह जारी करते हैं।

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