नाहरगढ़ हादसे की जांच रिपोर्ट तैयार: रेंजर समेत तीन कार्मिक दोषी

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जयपुर। नाहरगढ़ जैविक उद्यान में बाघ ‘शिवाजी’ के हमले में महिला श्रमिक की मौत के मामले की जांच रिपोर्ट मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) अनूप के.आर. ने विभाग को सौंप दी है। रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के आधार पर चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरुण प्रसाद के स्तर पर संबंधित कार्मिकों को चार्जशीट देने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

रेंजर समेत तीन कार्मिक दोषी

जांच रिपोर्ट में क्षेत्रीय वन अधिकारी द्वितीय गौरव कुमार, सहायक वनपाल एवं नाका प्रभारी प्रदीप कुमार तथा सहायक वनपाल एवं एनक्लोजर प्रभारी सोनू मीणा को जिम्मेदार माना गया है। हादसे के बाद तीनों को तत्काल एपीओ कर दिया गया था।

गौरतलब है कि 2 सितंबर को महिला गार्ड ने बाघ शिवाजी को बिना पर्याप्त जांच-परख के डिस्प्ले एरिया में छोड़ दिया था। उस समय एनक्लोजर नंबर 16 में सात महिला श्रमिक काम कर रही थीं। बाघ को देखते ही छह महिलाएं भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहीं, जबकि एक महिला श्रमिक बाघ के हमले की चपेट में आ गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

जांच अधिकारी बदला, 15 दिन बाद आई रिपोर्ट

हादसे की जांच शुरुआत में नाहरगढ़ के एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत को सौंपी गई थी और सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश थे। हालांकि, जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने के बाद 8 सितंबर को जांच की जिम्मेदारी सीसीएफ अनूप के.आर. को सौंप दी गई। जांच अधिकारी बदलने के कारण रिपोर्ट आने में करीब 15 दिन लग गए।

स्टाफ बढ़ाने पर जोर

सीसीएफ की रिपोर्ट में नाहरगढ़ जैविक उद्यान के एनक्लोजर और विस्तार को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या तत्काल बढ़ाने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हादसे के 15 दिन बाद भी डीएफओ और एसीएफ को अतिरिक्त कार्यभार से मुक्त नहीं किया गया है। वर्तमान में नाहरगढ़ की व्यवस्था मुख्य रूप से एक रेंजर द्वितीय के भरोसे चल रही है, जिससे दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और उद्यान में उपलब्ध मानव संसाधन के अनुरूप जिम्मेदारियां तय करने पर भी जोर दिया गया है।

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