जयपुर। देशभर के साथ जयपुर में शुक्रवार को जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। छोटी काशी के आराध्य श्री गोविंददेवजी सहित शहर के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में विशेष आयोजन हुए। आमतौर पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव रात 12 बजे मनाया जाता है, लेकिन जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित श्री राधा दामोदर मंदिर में कान्हा का जन्म दोपहर 12 बजे हुआ। करीब 500 साल पुरानी वृंदावन परंपरा के अनुसार यहां भगवान के बाल स्वरूप का प्राकट्य दिन में मनाया जाता है।
मंदिर में जन्मोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। दोपहर 12 बजे मंत्रोच्चारण के बीच ठाकुर जी का दुग्धाभिषेक किया गया। इसके बाद उन्हें नई पीले रंग की पोशाक धारण कराकर झूले में विराजमान कराया गया। विशेष पूजा-अर्चना के बाद पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाया गया। जन्मोत्सव के दौरान महिला श्रद्धालुओं ने बधाई गीत गाए और मंदिर परिसर ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा।
मंदिर के महंत मलय गोस्वामी ने बताया कि राधा दामोदर जी भगवान श्रीकृष्ण के करीब ढाई वर्ष के बाल स्वरूप के विग्रह हैं। इसी वजह से यहां रात 12 बजे के बजाय दोपहर 12 बजे जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। यह परंपरा करीब 500 साल पहले वृंदावन में शुरू हुई थी और आज भी उसी विधि से निभाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि करीब 500 साल पहले वृंदावन में सनातन गोस्वामी और रूप गोस्वामी भाइयों ने ठाकुरजी के विग्रह की सेवा-पूजा की परंपरा शुरू की थी। बाद में सेवा की जिम्मेदारी उनके भतीजे जीव गोस्वामी को दी गई। भगवान के बाल स्वरूप को देखते हुए गोस्वामी परिवार ने दोपहर 12 बजे जन्मोत्सव मनाने की परंपरा तय की, जो अब तक चली आ रही है।
महंत के अनुसार राधा दामोदर जी का विग्रह करीब 500 साल पुराना है और लगभग 300 साल पहले इसे वृंदावन से जयपुर लाया गया था। तभी से जयपुर में भी वृंदावन की परंपरा के अनुरूप ठाकुरजी की सेवा-पूजा की जा रही है।
जन्माष्टमी पर मंदिर में सुबह 5:30 बजे मंगला दर्शन हुए। इसके बाद सुबह 7:30 से 10:30 बजे तक श्रृंगार दर्शन कराए गए। सुबह 11 बजे जन्माष्टमी व्रत कथा हुई और दोपहर 12 बजे जन्मोत्सव शुरू हुआ। श्रद्धालुओं को जगमोहन में विशेष झांकी के दर्शन कराए गए।
मंदिर में शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक नंदोत्सव मनाया गया। बाल स्वरूप होने के कारण रात 11 बजे ठाकुर जी को शयन कराया गया। इसके बाद गोस्वामी परिवार की ओर से गोविंद देव जी के अभिषेक की परंपरा निभाई गई। इस तरह राधा दामोदर मंदिर में दिन में बाल कृष्ण का जन्मोत्सव और रात में गोविंद देव जी के प्राकट्य उत्सव की परंपरा का निर्वहन किया गया।



















