हरियाली अमावस्या पर गणेश मंदिरों में गूंजे मंत्र: पंचामृत अभिषेक से हुआ प्रथम पूज्य का श्रृंगार

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Mantras resonate in Ganesha temples on Hariyali Amavasya.
Mantras resonate in Ganesha temples on Hariyali Amavasya.

जयपुर। सावन मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या पर बुधवार को पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बना। करीब 50 साल बाद बने इस संयोग के चलते राजधानी के प्रमुख गणेश मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, दुग्ध एवं पंचामृत अभिषेक, शृंगार और धार्मिक अनुष्ठान हुए। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। गणपति सहस्रनाम, अथर्वशीर्ष पाठ, मोदकों का भोग और विशेष आरती के आयोजन हुए। भगवान गणेश को नवीन पोशाक धारण कराकर आकर्षक झांकियां सजाई गईं।

हरियाली अमावस्या प्रकृति, पर्यावरण और धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व है, जबकि पुष्य नक्षत्र को धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता है। बुधवार के इस विशेष संयोग ने पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ा दिया।

मोती डूंगरी में 151 किलो दूध से अभिषेक

मोती डूंगरी गणेश मंदिर में महंत पं. कैलाश शर्मा के सान्निध्य में भगवान गणेश का 151 किलो दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद भगवान को नवीन पोशाक धारण कराकर फूल बंगला झांकी सजाई गई। गणपति सहस्रनाम के साथ 1008 मोदकों का भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं को रक्षा सूत्र और हल्दी की गांठ प्रसाद स्वरूप वितरित की गई। विशेष संयोग के अवसर पर 100 किलो दूध से तैयार खीर का भोग भी लगाया गया। बाद में खीर का प्रसाद श्रद्धालुओं को वितरित किया गया।

नहर के गणेशजी में दूर्वा मार्जन से अभिषेक

ब्रह्मपुरी माउंट रोड स्थित अतिप्राचीन दाहिनी सूंड दक्षिणमुखी श्री नहर के गणेशजी महाराज मंदिर में मंदिर परिवार की ओर से दूर्वा मार्जन से पंचामृत अभिषेक किया गया। मंदिर युवाचार्य पं. मानव शर्मा ने बताया कि महंत पं. जय शर्मा के सान्निध्य में शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से अभिषेक हुआ। इसके बाद गणपति को नवीन पोशाक धारण कराकर पूजा-अर्चना और आरती की गई।
शाम को 251 दीपकों से महाआरती की गई। मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि और विघ्न निवारण की कामना के साथ रक्षा सूत्र वितरित किए गए।

परकोटा गणेश मंदिर में वन विहार झांकी

चांदपोल स्थित परकोटा गणेश मंदिर में महंत पं. अमित शर्मा के सान्निध्य में भगवान गणेश का 101 किलो दूध और पंचामृत से अभिषेक किया गया। दूध, दही, शहद, गंगाजल, केवड़ा, गुलाब जल और केसर जल से भगवान का अभिषेक हुआ। इसके बाद गणेशजी को सिंदूर का चोला चढ़ाकर नवीन पोशाक धारण कराई गई।

गणपति सहस्रनामावली से हवन कर 1008 मोदकों की आहुति दी गई। हरियाली अमावस्या के उपलक्ष्य में भगवान की वन विहार की अलौकिक झांकी सजाई गई और विभिन्न मिष्ठानों के साथ घेवर से बने व्यंजनों का भोग लगाया गया। गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ के बाद श्रद्धालुओं को गणेश एवं लक्ष्मी स्वरूप हल्दी की गांठ और सुपारी प्रसाद के रूप में वितरित की गई।
मंदिर परिसर को लहरिया थीम पर सजाया गया। शाम को भजन संध्या में स्थानीय भजन गायकों ने गणेशजी के भजनों की प्रस्तुतियां दीं।

अन्य मंदिरों में भी हुए आयोजन

हरियाली अमावस्या और पुष्य नक्षत्र के संयोग पर शहर के अन्य गणेश मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक किए गए। सूरजपोल बाजार स्थित श्वेत सिद्धि विनायक मंदिर, चौड़ा रास्ता के काले गणेशजी, दिल्ली बाईपास रोड स्थित आत्माराम गणेश मंदिर और बड़ी चौपड़ स्थित ध्वजाधीश गणेशजी सहित विभिन्न मंदिरों में भगवान का पंचामृत अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई गई। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर सुख-समृद्धि और विघ्न निवारण की कामना की।

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