महिला-बाल आयोग समेत कई संवैधानिक संस्थाएं खाली: न्याय की राह देख रहे फरियादी

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Many constitutional bodies, including the Women and Child Commission, are vacant.
Many constitutional bodies, including the Women and Child Commission, are vacant.

दिनेश कुमार सैनी

जयपुर। प्रदेश में महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति-जनजाति और अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच राजस्थान के कई महत्वपूर्ण संवैधानिक आयोग और बोर्ड पिछले करीब ढाई वर्षों से अध्यक्ष एवं सदस्यों के बिना संचालित हो रहे हैं। महिला आयोग, बाल आयोग, एससी-एसटी आयोग, ओबीसी आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, निशक्तजन आयोग, युवा बोर्ड, समाज कल्याण बोर्ड, हज कमेटी और राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण सहित कई संस्थाओं में लंबे समय से नियुक्तियां नहीं होने पर सवाल उठने लगे हैं।

हाल ही में जारी एनसीआरबी रिपोर्ट में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में वृद्धि सामने आने के बाद इन आयोगों की निष्क्रियता को लेकर विपक्ष ने भी सरकार को घेरा है। इन आयोगों में लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं, लेकिन अध्यक्ष और सदस्यों के पद रिक्त होने से मामलों का प्रभावी निस्तारण नहीं हो पा रहा है।

जनसुनवाई ठप, शिकायतों का समाधान प्रभावित

पूर्व राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष एवं कांग्रेस विधायक रफीक खान ने कहा कि सरकार बदलने के बाद आयोग को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। संसाधन और स्टाफ की कमी के कारण शिकायतों का समाधान प्रभावित हुआ, जिसके चलते आयोग की नियमित गतिविधियां भी बाधित हो गईं। आयोग के पूर्व सदस्य हरदीप सिंह चहल ने बताया कि पहले जिलों में जनसुनवाई कर लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जाता था, लेकिन अब अध्यक्ष और सदस्य नहीं होने से ऐसी व्यवस्थाएं बंद हैं।

महिला और बाल आयोग भी लंबे समय से निष्क्रिय

राजस्थान महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेहाना रियाज ने बताया कि उनके कार्यकाल में प्रतिदिन 25 से 30 मामलों की सुनवाई होती थी, लेकिन फरवरी 2025 से आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद संसाधन भी सीमित कर दिए गए थे।

वहीं, बाल आयोग की पूर्व अध्यक्ष संगीता बेनीवाल ने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान उनके इस्तीफे के बाद आयोग में नियुक्तियां नहीं हुईं। उनका कहना है कि महिलाओं और बच्चों पर बढ़ते अत्याचारों को देखते हुए सरकार को इन आयोगों में जल्द नियुक्तियां करनी चाहिए।

एससी-एसटी आयोग में भी नहीं हुई नियुक्तियां

एससी आयोग के पूर्व अध्यक्ष खिलाड़ी बैरवा ने कहा कि उनके कार्यकाल में जिलों में जाकर अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाती थी। जमीन कब्जाने, मारपीट और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने जैसे मामलों में पीड़ितों को त्वरित राहत मिलती थी। वर्तमान में आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद रिक्त होने से ऐसी व्यवस्था प्रभावित हुई है।

हज कमेटी और समाज कल्याण बोर्ड भी खाली

राजस्थान हज कमेटी और समाज कल्याण बोर्ड में भी सरकार बदलने के बाद से अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई है। इस वर्ष हज यात्रा का संचालन अधिकारियों के माध्यम से कराया गया। हालांकि कई व्यवस्थागत चुनौतियां भी सामने आईं। प्रशासनिक स्तर पर ही इन संस्थाओं का संचालन किया जा रहा है।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी इन आयोगों और बोर्डों में रिक्त पदों का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण सहित कई महत्वपूर्ण संस्थाओं में नियुक्तियां नहीं होने से कर्मचारियों और आम लोगों की समस्याओं का समाधान प्रभावित हो रहा है। उन्होंने महिला आयोग और युवा बोर्ड में भी रिक्त पदों को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इन महत्वपूर्ण संस्थाओं को प्राथमिकता नहीं दे रही।

राजनीतिक विश्लेषक बोले— कांग्रेस की राह पर भाजपा

राजनीतिक विश्लेषक राजेश शर्मा का कहना है कि भजनलाल सरकार भी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की तर्ज पर बोर्डों और आयोगों में नियुक्तियों में देरी कर रही है। उनका कहना है कि सरकार के कार्यकाल के लगभग ढाई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में अब तक नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। इससे न केवल जनसुनवाई प्रभावित हो रही है, बल्कि भाजपा के कार्यकर्ताओं में भी असंतोष की स्थिति बन रही है।
प्रदेश में महिला, बाल, अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक और अन्य वर्गों से जुड़े मामलों के समाधान के लिए गठित इन आयोगों में नियुक्तियों को लेकर अब सरकार पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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