डॉ. बंसल की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदेशभर में रही चिकित्सा सेवाएं ठप

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Medical services across the state were disrupted in protest against the arrest of Dr. Bansal.
Medical services across the state were disrupted in protest against the arrest of Dr. Bansal.

जयपुर। नेविक अस्पताल के निदेशक डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) राजस्थान के आह्वान पर प्रदेशभर में 24 घंटे का चिकित्सा बंद व्यापक रूप से सफल रहा। इस दौरान राज्य के लगभग सभी निजी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं, जबकि कई स्थानों पर इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित हुईं। हालांकि भर्ती (ओपीडी) मरीजों का उपचार जारी रखा गया।

जयपुर, कोटा, अलवर, उदयपुर सहित प्रदेशभर के प्रमुख निजी अस्पतालों—सी.के. बिरला, साकेत और फोर्टिस—में ओपीडी बंद रहने से मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा और बड़ी संख्या में मरीज सरकारी अस्पतालों की ओर रुख करते नजर आए। अस्पतालों के बाहर बंदी के नोटिस भी चस्पा किए गए थे।

गौरतलब है कि 12 अप्रैल को जयपुर पुलिस ने आरजीएचएस योजना में कथित अनियमितताओं के आरोप में डॉ. सोनदेव बंसल को गिरफ्तार किया था। चिकित्सकों का कहना है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही नहीं पाए जाने के बावजूद छोटी प्रक्रियात्मक त्रुटियों पर आपराधिक कार्रवाई अनुचित है।

इस मुद्दे को लेकर आईएमए और प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन सहित विभिन्न चिकित्सा संगठनों ने आपात बैठक कर 14 अप्रैल सुबह 8 बजे से 15 अप्रैल सुबह 8 बजे तक हड़ताल का निर्णय लिया था।

आईएमए राजस्थान ने राज्य सरकार को ज्ञापन भेजकर डॉ. बंसल की बिना शर्त रिहाई, संबंधित पुलिस कार्रवाई की जांच, आरजीएचएस मामलों में स्पष्ट एसओपी लागू करने तथा लंबित भुगतानों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाए जाएंगे।

आईएमए अध्यक्ष डॉ. आनंद गुप्ता ने कहा कि छोटी त्रुटियों पर गिरफ्तारी से डॉक्टरों में भय का माहौल बन रहा है। वहीं चिकित्सकों ने बताया कि आरजीएचएस योजना के तहत 9-10 माह से भुगतान लंबित होने से अस्पतालों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

संघटनाओं ने स्पष्ट किया कि समस्याओं के समाधान तक आरजीएचएस सेवाओं का स्थगन जारी रह सकता है। हालांकि आईएमए ने आमजन को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम चिकित्सा पेशे की गरिमा और सुरक्षा के लिए उठाया गया है।

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