जयपुर। प्रदेशभर में शुक्रवार को भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन धूमधाम से मनाया गया। जयपुर सेंट्रल जेल में भी इस पर्व का भावुक रंग देखने को मिला। सुबह से ही बड़ी संख्या में बहनें जेल में बंद अपने भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं। सलाखों के पीछे भाइयों की कलाई पर राखी बांधते समय कई बहनों की आंखें नम हो गईं। किसी ने भाई को मिठाई खिलाई तो किसी ने कुछ पल बात कर अपना मन हल्का किया।
जेल प्रशासन ने रक्षाबंधन पर बंदियों और उनके परिजनों की मुलाकात के लिए विशेष व्यवस्था की थी। बहनों को सुरक्षा जांच के बाद जेल के मेन गेट के पास निर्धारित स्थान पर भाइयों से मिलवाया गया। महज दो मिनट की मुलाकात में बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, मिठाई खिलाई और जल्द रिहाई की प्रार्थना की।

तीन स्तरीय सुरक्षा के बाद मिला प्रवेश
जेल अधीक्षक डॉ. अभिषेक शर्मा ने बताया कि रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह से जुड़ा भावनात्मक पर्व है। बंदियों की बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकें, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महिलाओं को तीन स्तरीय जांच के बाद जेल परिसर में प्रवेश दिया गया।
बाहर आरएसी स्टाफ ने सुरक्षा जांच की। इसके बाद अंदर भी दो चरणों में जांच कर महिलाओं को राखी बांधने के लिए भेजा गया। बहनें भाइयों के लिए मिठाई लेकर पहुंचीं, जिसकी भी जांच की गई। जेल परिसर के भीतर निर्धारित मात्रा में एक किलो तक मिठाई ले जाने की अनुमति दी गई।

दो मिनट में बांधा प्रेम का धागा
राखी बांधने वाले बंदियों को पहले ही मेन गेट के पास बुला लिया गया था, ताकि बहनों को ज्यादा इंतजार न करना पड़े। सलाखों के दोनों ओर सुरक्षा के लिए प्रहरी तैनात रहे। निर्धारित दो मिनट की मुलाकात में बहनों ने भाइयों को राखी बांधी और मिठाई खिलाई।
भाई-बहनों ने एक-दूसरे का हालचाल पूछा और कुछ पल बातचीत की। समय पूरा होते ही बहनों को लौटना पड़ा। कई बहनें मुस्कुराते हुए जेल पहुंची थीं, लेकिन भाई की कलाई पर राखी बांधकर लौटते समय उनकी आंखों में आंसू थे।

‘आगे कोई गलती मत करना’
कई बहनों ने राखी बांधते समय भाइयों से कहा कि वे पुराने अपराधों को पीछे छोड़कर आगे सही रास्ते पर चलें। बहनों ने जल्द रिहाई की प्रार्थना करते हुए भाइयों से परिवार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन बिताने और दोबारा किसी गलत गतिविधि में शामिल नहीं होने का वादा लिया।
वहीं, भाइयों ने भी बहनों को भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में गलत गतिविधियों से दूर रहकर बेहतर जीवन जीने का प्रयास करेंगे। इस तरह राखी का धागा उनके लिए सिर्फ प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि नई शुरुआत और अपराध से दूर रहने के संकल्प का भी माध्यम बना।
‘जेल सुधारात्मक संस्था के रूप में काम करती है’
जेल अधीक्षक डॉ. अभिषेक शर्मा ने कहा कि जेल की चारदीवारी में रहने वाले बंदियों के साथ मानवीय संवेदनाएं भी जुड़ी हैं। रक्षाबंधन भावनाओं से जुड़ा पर्व है, इसलिए इसे सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई।
उन्होंने कहा कि जेल केवल दंड देने की जगह नहीं, बल्कि एक सुधारात्मक संस्था के रूप में भी काम करती है, ताकि यहां से बाहर निकलने के बाद व्यक्ति समाज की मुख्यधारा में लौट सके। अपराध करने वाले व्यक्ति में सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है। वहीं, बंदियों के परिजनों ने कोई अपराध नहीं किया है, इसलिए उनकी भावनाओं का सम्मान करना भी जरूरी है।
जेल की ऊंची दीवारों, सलाखों और कड़ी सुरक्षा के बीच रक्षाबंधन का यह आयोजन भाई-बहन के रिश्ते की भावनाओं से जुड़ा रहा। कुछ पल की मुलाकात में बहनों का स्नेह, आंखों के आंसू और भाइयों से किए गए बेहतर जीवन के वादे इस पर्व को यादगार बना गए।



















