जयपुर। भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को गुलाबी नगरी में पारंपरिक उल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। इस बार भद्रा का साया नहीं होने और बुद्धादित्य योग बनने से दिनभर राखी बांधने का सिलसिला चला। छोटी काशी जयपुर घरों से लेकर मंदिरों तक रक्षाबंधन की रौनक से सराबोर रही।
सुबह से ही घरों में पर्व की तैयारियां शुरू हो गईं। मुख्य द्वारों पर स्वस्तिक बनाकर सूण जिमाने की परंपरा निभाई गई। इसके बाद मंदिरों में लड्डू गोपाल को राखी अर्पित की गई और पितरों के निमित्त रक्षा सूत्र निकाला गया। शुभ मुहूर्त में बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक और अक्षत लगाए, दाहिनी कलाई पर राखी बांधी और आरती उतारकर उनके दीर्घायु, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना की।
भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर जीवनभर उनके सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लिया। इस बार कुछ भाइयों ने सुरक्षा के संकल्प को एक कदम आगे बढ़ाते हुए बहनों के लिए बीमा पॉलिसी भी कराई। इसके जरिए उन्होंने बहनों को भविष्य की आर्थिक चिंता से सुरक्षा देने का प्रयास किया।
रक्षाबंधन पर शहर में परंपरा और आधुनिकता का संगम देखने को मिला। बड़ों की कलाई पर राम राखी सजी नजर आई तो बच्चों के हाथों में रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियां दिखाई दीं। विवाहित बहनें अपने काम-काज निपटाकर भाइयों के घर पहुंचीं और भाइयों के साथ भाभी तथा भतीजे-भतीजियों की कलाई पर भी रक्षा सूत्र बांधे।

पूरे दिन भाई-बहन एक-दूसरे के घर पहुंचते रहे। कहीं बहनों ने भाइयों को राखी बांधकर स्नेह का धागा मजबूत किया तो कहीं भाइयों ने उपहार देकर बहनों की खुशियों में इजाफा किया। इस तरह रक्षाबंधन ने जयपुर में पारिवारिक मिलन, प्रेम और सुरक्षा के भाव को और गहरा कर दिया।
वहीं रक्षाबंधन पर राज्य सरकार के निर्देश पर राजस्थान रोडवेज ने प्रदेशभर में महिलाओं और बालिकाओं के लिए मुफ्त यात्रा की व्यवस्था की। यह सुविधा गुरुवार रात 12 बजे से शुरू हो गई थी। शुक्रवार को भाइयों को राखी बांधने के लिए आने-जाने वाली महिलाओं का बसों में दिनभर रैला लगा रहा।
मुफ्त यात्रा की सुविधा के चलते बड़ी संख्या में महिलाओं ने निजी बसों के बजाय रोडवेज बसों को प्राथमिकता दी। बसों में महिला यात्रियों की संख्या कई जगह पुरुष यात्रियों के मुकाबले काफी अधिक नजर आई। मुफ्त सफर की सौगात से महिलाओं में खुशी भी दिखाई दी।
हालांकि कई स्थानों पर भीड़ अधिक होने से महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ जगह भीड़ के कारण यात्री आपस में उलझते भी नजर आए। बसों में महिलाओं की भारी भीड़ को देखते हुए कई पुरुष यात्रियों ने निजी बसों या अन्य साधनों से सफर करना उचित समझा।
इस तरह रक्षाबंधन पर जयपुर में जहां घर-घर प्रेम और विश्वास का धागा मजबूत हुआ, वहीं रोडवेज की मुफ्त यात्रा ने बहनों के लिए पर्व पर आवागमन को सुविधाजनक बनाने में अहम भूमिका निभाई।



















