जयपुर/कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू), कोटा के विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों की टीम “सच का कवच” ने राष्ट्रीय स्तर के पीएसबी हैकाथॉन-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश भर में तृतीय स्थान प्राप्त किया और विजेता आरटीयू टीम को आईआईटी गांधीनगर के निदेशक प्रो. रजत मूणा, बैंक ऑफ बड़ौदा के कार्यकारी निदेशक श्री संजय वी. मुदलियार एवं इंडियन बैंक एसोसिएशन के वरिष्ठ सलाहकार श्री राजीव रंजन प्रसाद ने ₹2 लाख का पुरस्कार प्रदान किया।
आरटीयू के सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि इस टीम में बीटेक चतुर्थ वर्ष के अभ्युदय जैन, हार्दिक माथुर, सिद्धार्थ राउत और बीटेक तृतीय वर्ष की चित्रा सैनी सम्मलित थी। यह हैकाथॉन बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा आईआईटी गांधीनगर के सहयोग से आयोजित किया गया था। बैंक ऑफ बड़ौदा के आधिकारिक हैकाथॉन के अनुसार, इसका मुख्य विषय “आइडेंटीटी ट्रस्ट, प्रोटेक्शन और सेफ्टी” था और इसका उद्देश्य सुरक्षित एवं भरोसेमंद डिजिटल बैंकिंग के लिए नवीन तकनीकी समाधान विकसित करना था।
इस हैकाथॉन में देशभर से 450 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से चयन प्रक्रिया के बाद 17 टीमों को ग्रैंड फिनाले के लिए चुना गया। देशभर से प्रतिभागी टीमों ने हैकाथॉन-2026 में नवीन तकनीकी समाधानों और रचनात्मक विचारों के साथ भाग लिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच आरटीयू की टीम “सच का कवच” ने अपनी तकनीकी दक्षता, नवाचार, समस्या-समाधान क्षमता एवं प्रभावी प्रस्तुतीकरण के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया।
पीएसबी हैकाथॉन-2026 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वास्तविक चुनौतियों के समाधान के लिए आयोजित राष्ट्रीय स्तर पर आरटीयू की टीम “सच का कवच” ने आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस, साईबर सिक्यूरिटी, फ्राड डीटक्सशन, डिजिटल बैंकिंग, फ़ाइनेसिअल इन्क्लुसन, डाटा ऐनालाइस और प्रोसेस ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों को समाधान विकसित करने को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
कुलगुरु प्रो निमित चौधरी ने टीम की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि टीम ‘सच का कवच’ की यह उपलब्धि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा के लिए गौरव का विषय है। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में देशभर की प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच तृतीय स्थान प्राप्त कर टीम ने आरटीयू के विद्यार्थियों की तकनीकी क्षमता, नवाचार और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया है। उन्होंने प्रतिभागी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां विद्यार्थियों में नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी कौशल को प्रोत्साहित करती हैं तथा आरटीयू को देश के तकनीकी शिक्षण संस्थानों के बीच नई पहचान दिलाती हैं।
आरटीयू विद्यार्थियों में नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप एवं उभरती तकनीकी के प्रति रुचि विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विद्यार्थियों की प्रतिभा और मेहनत ने यह साबित किया है कि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। उन्होंने इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार नवाचार एवं तकनीकी उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
“सच का कवच” बैंकिंग सेक्टर होने वाले जोखिम को रोकेगा, एआई क्रांति के उपयोग से बैंकिंग समस्याओं का प्रभावी समाधान
आरटीयू कोटा की टीम ‘सच का कवच’ में चित्रा सैनी, अभ्युदय जैन, हार्दिक माथुर और सिद्धार्थ राउत शामिल हैं। टीम ने बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड, पहचान की चोरी, अकाउंट टेकओवर और अंदरूनी सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए एआई आधारित सुरक्षा समाधान विकसित किया। “सच का कवच” का मूल विचार डिजिटल बैंकिंग में ‘आईडेंटीटी’ को लगातार बनाए रखना है। समाधान ग्राहक के सामान्य व्यवहार और डिजिटल गतिविधियों को समझ कर किसी असामान्य गतिविधि या जोखिमपूर्ण व्यवहार की पहचान करने का प्रयास करता है। इसमें नए डिवाइस से लॉगिन, असामान्य ग्राहक व्यवहार, संदिग्ध केवाईसी/ऑनबोर्डिंग, अकाउंट रिकवरी के संदिग्ध प्रयास, पहचान के साथ छेड़छाड़ और प्रिविलेज्ड एक्सेस के दुरुपयोग जैसे जोखिमों को पहचानने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया गया है।
ये वही प्रमुख जोखिम क्षेत्र हैं जिन्हें बैंक ऑफ बड़ौदा के हैकाथॉन के मूल प्रॉब्लम स्टेटमेंट में भी चिन्हित किया गया था। टीम के समाधान की खासियत यह है कि यह केवल किसी एक ट्रांजेक्शन को संदिग्ध मानने के बजाय ग्राहक की पूरी डिजिटल आइडेंटिटी और उसके व्यवहार के संदर्भ में जोखिम को समझने की अवधारणा पर काम करता है। सिस्टम विभिन्न संकेतों को जोड़कर जोखिम का आकलन करता है और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त वेरिफिकेशन, अलर्ट या सुरक्षा कार्रवाई की दिशा में बैंकिंग प्रणाली को सहायता प्रदान कर सकता टीम ने समाधान की तकनीकी कार्यप्रणाली, संभावित बैंकिंग उपयोग तथा वास्तविक बैंकिंग वातावरण में इसके उपयोग की संभावनाओं को विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किया।
विजेता टीम “सच का कवच” ने समाज और देश की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नवाचार एवं तकनीकी के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की जताई मंशा
विजेता टीम के अभ्युदय जैन, हार्दिक माथुर, सिद्धार्थ राउत और बीटेक तृतीय वर्ष की चित्रा सैनी ने कहा कि हैकाथॉन-2026 में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त करना हमारे लिए बेहद गौरव और खुशी का क्षण है। ‘सच का कवच’ टीम के रूप में हमने अपनी तकनीकी समझ, रचनात्मक सोच और टीमवर्क के माध्यम से इस चुनौती का समाधान तैयार किया। इस उपलब्धि से हमें यह विश्वास मिला है कि मेहनत, नवाचार और निरंतर सीखने की भावना के साथ हम राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकते हैं।
हम इस सफलता का श्रेय अपने मार्गदर्शकों, शिक्षकों, संस्थान तथा अपने परिवार को देना चाहते हैं, जिन्होंने हर कदम पर हमारा उत्साह बढ़ाया और मार्गदर्शन दिया। ₹2 लाख का पुरस्कार हमारे लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि भविष्य में और बेहतर तकनीकी समाधान विकसित करने की प्रेरणा है। हम आगे भी समाज और देश की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नवाचार एवं तकनीकी के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह पुरस्कार हमारी मेहनत और प्रयासों का सम्मान है, साथ ही यह हमें भविष्य में और बेहतर एवं उपयोगी तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा।


















