ग्रह-गोचर: शनि जयंती-शनिश्चरी अमावस्या पर शश महापुरुष राजयोग

0
156
Shash Mahapurush Rajyoga on Shani Jayanti-Shanischari Amavasya
Shash Mahapurush Rajyoga on Shani Jayanti-Shanischari Amavasya

जयपुर। इस माह 16 मई को शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या का दुर्लभ एवं अत्यंत फलदायी संयोग रहेगा। शनिवार के दिन पडऩे वाली अमावस्या को ‘शनिश्चरी अमावस्या’ कहा जाता है, जो विशेष रूप से शुभ और प्रभावशाली मानी जाती है। इस बार यह संयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शनि देव अपनी स्वराशि कुंभ में स्थित रहकर शश महापुरुष राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। साथ ही सूर्य, शनि और चंद्रमा की विशेष ग्रह स्थिति धन, समृद्धि और सुख में वृद्धि का शक्तिशाली योग बना रही है।

पंडित बनवारी लाल शर्मा के अनुसार अमावस्या तिथि का प्रारंभ 16 मई को प्रात: 5:11 बजे से होगा और इसका समापन 17 मई को देर रात 1:30 बजे तक रहेगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 4:07 से 4:48 बजे तक रहेगा, जिसे साधना, जप और ध्यान के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इसके अतिरिक्त दिन में सौभाग्य योग प्रात: 10:26 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शोभन योग प्रारंभ होकर 17 मई प्रात: 6:15 बजे तक प्रभावी रहेगा।

आध्यात्मिक दृष्टि से शनि देव को ब्रह्मांड का न्यायाधीश माना जाता है, जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। मान्यता है कि शनि जयंती का दिन सोए हुए भाग्य को जागृत करने का सुनहरा अवसर होता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा जीवन के कष्टों को कम कर मानसिक शांति और स्थायी समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।

विशेष रूप से वे जातक जिनकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए यह दिन अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इस अवसर पर किए गए उपाय शनि के कुप्रभावों को कम करते हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। विद्वानों के अनुसार शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन तैलाभिषेक करना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here