जयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर कांग्रेस के विरोध पर निशाना साधते हुए कहा कि यह प्रक्रिया न तो भारत में पहली बार हो रही है और न ही दुनिया के लिए नई है। कांग्रेस शासनकाल में भी 10 बार एसआईआर हो चुका है। उस समय कांग्रेस को इसमें लोकतंत्र के लिए कोई खतरा नजर नहीं आया, लेकिन 23 साल बाद अब यह प्रक्रिया हो रही है तो कांग्रेस लोकतंत्र खतरे में होने का दावा कर रही है।
राठौड़ ने कहा कि लोकतंत्र के लिए वास्तविक खतरा कांग्रेस की आपातकाल वाली मानसिकता और विदेशी टूलकिट के सहारे की जा रही राजनीति से है। कांग्रेस नेता झूठ फैलाकर देश में अराजकता का माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जो न देश की जनता के हित में है और न ही लोकतंत्र के।
राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी को लोकतंत्र से जोड़कर बातें करना कांग्रेस की राजनीतिक सोच को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत आलाकमान को खुश करने और राहुल गांधी के निर्देशों पर बयानबाजी कर रहे हैं।
राठौड़ ने कहा कि जिस भारत बचाओ रैली की बात कांग्रेस कर रही है, उससे पहले इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोपा था। उस दौरान अखबारों पर पाबंदियां लगी थीं, जनता के अधिकार निलंबित कर दिए गए थे और विपक्षी नेता सड़कों पर नहीं, बल्कि जेलों में थे।
उन्होंने कहा कि जिनका आदर्श इंदिरा गांधी जैसी नेता हों, उनसे लोकतंत्र की रक्षा की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसी सोच के खिलाफ भाजपा ने जनता को जागरूक करने के लिए ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू किया है।
राठौड़ ने कांग्रेस के 13 करोड़ वोट काटने के आरोप को राजनीतिक पाखंड बताते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र की बात करती है, लेकिन उसका विश्वास लूटतंत्र और भीड़तंत्र में है। उन्होंने दावा किया कि जिन 13 करोड़ मतदाताओं के नामों को लेकर कांग्रेस सवाल उठा रही है।
उनमें से 2.80 करोड़ मतदाताओं का निधन हो चुका है, 6.30 करोड़ मतदाताओं ने अपना स्थान बदल लिया है और एक करोड़ मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं। वहीं, तीन करोड़ मतदाताओं के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है और उन्हें केवल चिह्नित किया गया है, उनके नाम काटे नहीं गए हैं।
राठौड़ ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस मृतकों और दूसरे स्थानों पर जा चुके मतदाताओं के नाम पर अन्य लोगों से मतदान करवाकर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाना चाहती है?

















