जयपुर। वैशाख कृष्ण चतुर्दशी गुरुवार को भगवान विष्णु के चौथे अवतार नृसिंह भगवान का प्राकट्य उत्सव धूमधाम से मनाया गया। त्रिवेणी धाम, पुरानी बस्ती, टांसपोर्टनगर, पांच बत्ती चौराहा, सिटी पैलेस के पास स्थित नृसिंह भगवान के मंदिरों में दिनभर धार्मिक आयोजन हुए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सुबह नृसिंह मंदिरों में भगवान का पंचामृत से अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई गई।
जन्मोत्सव की बधाइयों के साथ श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक उछाल की परंपरा निभाई। नृसिंह जयंती पर श्रद्धालुओं ने व्रत-पूजन के साथ दान-पुण्य भी किया। श्रद्धालुओं ने अनाज, तिल, वस्त्र एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। दिनभर भजन-कीर्तन, मंत्रजप एवं हवन-पूजन का क्रम चलता रहा। सूर्यास्त के समय विशेष पूजा-अर्चना कर महाआरती की गई।
चांदपोल बाजार के नींदड़ रावजी का रास्ता स्थित श्री नृसिंह जी अग्रवाल पंचायत मंदिर में गुरुवार को नृसिंह जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। समिति के अध्यक्ष चेतन अग्रवाल ने बताया कि मंदिर महंत मनमोहन शर्मा के सान्निध्य में भगवान नृसिंह जी का पंचामृत अभिषेक करन नई पोशाक धारण कराई गई। महामंत्री कैलाश चंद्र अग्रवाल, उपाध्यक्ष मनोज अग्रवाल और कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल ने भगवान की आरती उतारी। मंदिर में छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
लगाया 1156 प्रकार के व्यंजनों का भोग
पुरानी बस्ती स्थित बंसी वाले बाबा की बगीची में नृसिंह जयंती और पाटोत्सव गुरुवार को संपन्न हुआ। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान नृसिंह के प्राकट्य उत्सव का आनंद लिया।
पाटोत्सव के अंतर्गत भगवान नृसिंह का 501 लीटर पंचामृत, पंचगव्य, विभिन्न फलों के रस तथा देशभर के 20 से अधिक तीर्थों से मंगाए गए पवित्र जल से अभिषेक किया गया। भगवान को नवीन वस्त्र-आभूषण धारण कराकर विविध पुष्पों से आकर्षक श्रृंगार किया गया। नृसिंह देव एवं हनुमान जी को 1156 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। सुबह संत-महात्माओं के सान्निध्य में बलराम सत्संग मंडल की ओर से नाम संकीर्तन एवं बधाई गान प्रस्तुत किए गए।
वहीं त्रिवेणी धाम सत्संग मंडल की ओर से भी कीर्तन, बधाई गान एवं प्राकट्य महोत्सव का आयोजन हुआ। त्रिवेणी धाम के पीठाधीश्वर संत रामरिछपाल दास महाराज के सान्निध्य में हवन हुआ। महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। शाम को बैंड-बाजों की मधुर स्वर लहरियों के बीच आतिशबाजी की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच भगवान नृसिंह के खंभ फाडक़र प्रकट होने की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु जीवंत झांकी के दर्शन करने पहुंचे।

चौड़ा रास्ता में हुआ लीला मंचन
चौड़ा रास्ता स्थित ताडक़ेश्वर मंदिर के बाहर शाम को पारंपरिक नृसिंह लीला का सजीव मंचन किया गया। भगवान के खंभ फाडक़र प्रकट होने की झांकी ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। बड़ी देर तक नृसिंह भगवान ने भक्तों को दर्शन दिए। शुक्रवार को वराह लीला का मंचन होगा।
हाथोज धाम में शालिग्राम स्वरूप की अर्चना
श्रीनृसिंह चतुर्दशी पर हाथोज धाम स्थित प्राचीन मंदिर में शालिग्राम स्वरूप श्रीनृसिंह भगवान का प्राकट्योत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। स्वामी बालमुकुंदाचार्य महाराज ने मंदिर में विराजित लगभग 400 वर्ष प्राचीन श्रीशालिग्राम स्वरूप श्रीनृसिंह भगवान का पंचामृत से अभिषेक किया। इसके बाद गुलाब जल एवं विभिन्न प्रकार के सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया। श्रृंगार के बाद भक्तों ने श्रीनृसिंह स्तोत्र का सामूहिक पाठ किया।
श्री गोविंद देवजी मंदिर में धूमधाम से मनाई गई नरसिंह चतुर्दशी
परकोटे के आराध्य देव श्री गोविंद देवजी मंदिर में गुरुवार को उल्लास के साथ उत्सव नरसिंह चतुर्दशी मनाई गई। इस पावन अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए और ठाकुरजी का भव्य शृंगार किया गया।

वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ अभिषेक
मंदिर प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गुरुवार (वैशाख शुक्ल 14) को मंगला झांकी से पूर्व ठाकुर श्रीजी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक किया गया। इस दौरान ठाकुरजी को नवीन केसरिया धोती-दुपट्टा और विशेष अलंकारों से सुसज्जित किया गया।
पंचामृत अभिषेक और विशेष भोग
गवाल झांकी के पश्चात ठाकुर श्री शालिग्राम जी (नारायण जी) का पंचामृत अभिषेक किया गया। यह सेवा एवं भोग अर्पण श्री मन्माधव गौड़ेश्वरचार्य महंत श्री अंजन कुमार गोस्वामी जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ।
उत्सव के क्रम में संध्या आरती के बाद शयन झांकी से पूर्व ठाकुर श्रीजी को विशेष पकाल भोग (दही-चावल) अर्पित किया गया। साथ ही, इस पावन दिवस पर ठाकुरजी को शीतल ऋतु फल, पंच मेवा भोग और दाल-भिजौना भोग अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की गई।
भगवान श्री नरसिंह देव प्रकटोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया
मानसरोवर में स्थित श्री श्री गिरिधारी दाऊजी मंदिर में भगवान श्री नरसिंह देव के पावन प्रकटोत्सव के अवसर पर भव्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस शुभ अवसर पर मंदिर के भक्तों द्वारा वैदिक परंपरा के अनुसार नरसिंह यज्ञ संपन्न हुआ , जिसमें जयपुर के 11 दंपत्तियों ने श्रद्धापूर्वक हवन में भाग लिया। यज्ञ का आयोजन मंदिर के पुजारी कुमुदवन कृष्ण दास एवं सुविलास दास के सानिध्य में विधिवत रूप से संपन्न हुआ।कार्यक्रम के दौरान त्रिविक्रम प्रिया दास ने भगवान नरसिंह देव की दिव्य लीलाओं एवं भक्त प्रह्लाद की कथा पर प्रेरणादायक प्रवचन दिया।
कथा में बताया गया कि हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को अनेक कष्ट दिए, किंतु प्रह्लाद अडिग भक्ति में स्थित रहे। जब हिरण्यकशिपु ने क्रोध में आकर स्तंभ की ओर संकेत करते हुए पूछा कि “क्या तेरा भगवान इसमें भी है। तब भगवान ने अपने भक्त की रक्षा के लिए स्तंभ से प्रकट होकर उग्र नरसिंह रूप धारण किया। उन्होंने संध्या समय (न दिन, न रात), दहलीज पर (न अंदर, न बाहर), अपने नखों से (न अस्त्र, न शस्त्र) हिरण्यकशिपु का वध किया। इस प्रकार भगवान ने अपने भक्त की रक्षा करते हुए अपने वचन और वरदानों की मर्यादा को भी पूर्ण किया।
श्रील प्रभुपाद के ग्रंथों के अनुसार, भगवान नरसिंह देव का यह उग्र स्वरूप केवल दुष्टों के लिए भयावह है, जबकि भक्तों के लिए वे अत्यंत करुणामय और रक्षक हैं। वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं और सदैव उनके साथ रहते हैं।
इसके पश्चात भक्तों ने महा नरसिंह आरती की। सभी भक्तों ने दिनभर उपवास रखकर संध्या समय तक भक्ति में लीन होकर इस उत्सव को भक्तिभाव से मनाया। मंदिर में इस अवसर पर प्रातः 10 बजे से रात्रि 10 बजे तक हरिनाम संकीर्तन का भी आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभोज (सहगार प्रसादी) का लाभ प्राप्त किया। मंदिर के अध्यक्ष पंचरत्न दास ने इस पूरे कार्यक्रम की जानकारी दी और सभी भक्तों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
नरसिम्हा चतुर्दशी पर गुप्त वृन्दावन धाम में हुआ विघ्न विनाशक नरसिम्हा यज्ञ
वहीं भगवान् नरसिम्हा अपने भक्तो के विघ्नों का नाश करने वाले हैं अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए उन्होंने सतयुग में अवतार लिया, जब भी अधर्म बढ़ता है तब धर्म की स्थापना करने के लिए भगवान् अवतार लेते है और भक्तों की रक्षा करते हैं।
30 अप्रैल को जयपुर के गुप्त वृन्दावन धाम में भगवान् नरसिम्हा का प्राकट्य दिवस, नरसिम्हा चतुर्दशी के रूप में मनाया गया। नरसिम्हा चतुर्दशी पर मंदिर में भव्य आयोजन किया गया जिसमे पूरे शहर से बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया, भगवान् का आशीर्वाद प्राप्त किया और अपनी रक्षा की कामना की| भगवान् नरसिम्हा के प्राकट्य दिवस पर गुप्त वृन्दावन धाम में संकट हरन नरसिम्हा यज्ञ का आयोजन हुआ इसके साथ ही तीन दिवसीय नरसिम्हा कथा (भगवान् की लीलाओं का वर्णन) भी समाप्त हुई।
नरसिम्हा चतुर्दशी पर श्री श्री कृष्ण बलराम का विशेष चन्दन अलंकार किया गया और मंदिर की विशेष फूलों से सजावट की गई| गुप्त वृन्दावन धाम के अध्यक्ष श्री अमितासना दास ने बताया की भगवान् नरसिम्हा, नरसिम्हा चतुर्दशी के दिन सूर्यास्त के समय प्रकट हुए थे और इसीलिए विशेषकर सूर्यास्त के समय ही भगवान् की पूजा अर्चना की जाती है| जो भक्त भगवान् नरसिम्हा के प्राकट्य दिवस पर उनकी विधि विधान से पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं उन्हें अक्षय फल की प्राप्ति होती है और वैकुण्ठ लोक में स्थान मिलता है।



















