जयपुर। गणेश चतुर्थी महोत्सव के तहत बुधवार को बनीपार्क स्थित माधव विलास में श्री गणेश कथा का आयोजन हुआ। संकटमोचन हनुमान मंदिर के सेवक एवं गौभक्त गोपालशरण महाराज ने कथा का वाचन किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की महिमा और आध्यात्मिक महत्व का श्रवण किया।
कथा के शुभारंभ पर ऊषा-ओमप्रकाश मालपानी, रीतू, बसंत, चेतना और शरद कुचामन वाले सहित श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की महाआरती की। गोपालशरण महाराज ने कहा कि गणेशजी प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता हैं। उनके स्वरूप का प्रत्येक अंग जीवन में ज्ञान, विवेक और सकारात्मक सोच का संदेश देता है।
उन्होंने बताया कि गणेशजी का बड़ा मस्तक व्यापक सोच व दूरदर्शिता, बड़े कान ध्यानपूर्वक सुनने, छोटी आंखें एकाग्रता और सूंड परिस्थितियों के अनुरूप विवेकपूर्ण निर्णय लेने का प्रतीक है। बड़ा पेट अच्छे-बुरे अनुभवों को धैर्यपूर्वक स्वीकार करने तथा मूषक मन की चंचलता और इच्छाओं पर नियंत्रण का संदेश देता है।
महाराज ने कहा कि गणेश आराधना केवल बाहरी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना नहीं, बल्कि अज्ञान, अहंकार और नकारात्मक विचारों को दूर करने का संकल्प भी है। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।


















