जयपुर। मोती डूंगरी गणेश जी महाराज के दरबार में इन दिनों गणेश जन्मोत्सव की धूम है। उत्सव के हर दिन धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए आस्था के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। गुरुवार को मंदिर परिसर में भक्ति के साथ घुंघरुओं की खनक गूंजी। कथक कलाकार रेखा सैनी के निर्देशन में विभिन्न कलाकारों और विद्यार्थियों ने कथक की मुद्राओं, भाव और ताल के जरिए भगवान गणेश की आराधना की।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘गजाननं भूत गणादि सेवितं…’ श्लोक पर कथक प्रस्तुति से हुई। इसके बाद राग भूपाली पर आधारित ‘गाइए गणपति जगवंदन…’ की प्रस्तुति में कलाकारों ने कथक के भाव और मुद्राओं के जरिए गजानन महाराज को रिझाया। नृत्य में भक्ति और भाव के साथ शास्त्रीय कथक की बारीकियां भी देखने को मिलीं।

रेखा सैनी के निर्देशन में विद्यार्थियों ने तीन ताल पर आधारित कथक की विभिन्न बंदिशें प्रस्तुत कीं। पारंपरिक जयपुर घराने की विशिष्ट आमद, चक्करदार परन और चक्करदार प्रमिलू की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को खास बना दिया। कलाकारों के पैरों में बंधे घुंघरुओं की लय और ताल के बीच श्रद्धालुओं ने गणपति की स्तुति का आनंद लिया।
इसके बाद ‘वक्रतुण्ड महाकाय, कोटि सूर्य समप्रभ…’ श्लोक के साथ भगवान गणेश की आराधना की गई। राग नंद पर आधारित ‘विघ्न हरण गौरी के नंदन…’ गणेश वंदना के दौरान कलाकारों ने विलंबित, उठान, परन और तिहाइयों सहित कथक की विभिन्न बंदिशें प्रस्तुत कीं। प्रस्तुतियों में शास्त्रीय नृत्य की तकनीक के साथ गणपति के प्रति भक्ति और समर्पण का भाव नजर आया।

जन्मोत्सव में आस्था के अलग-अलग रंग
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गणेश जन्मोत्सव के तहत हर दिन अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हो रहे हैं। कभी मोदकों की विशाल झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन रही है तो कभी संगीत और नृत्य के जरिए कलाकार गणपति के चरणों में अपनी कला समर्पित कर रहे हैं। गुरुवार को कथक की प्रस्तुति ने जन्मोत्सव में शास्त्रीय नृत्य और भक्ति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।



















