नशामुक्त-शाकाहारी और आध्यात्मिक समाज से ही होगा राष्ट्र का कल्याण: बाबा उमाकांत महाराज

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जयपुर। राजधानी जयपुर के बगरू के ठीकरिया स्थित जयगुरुदेव आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय आध्यात्मिक गुरु पूर्णिमा महोत्सव में बाबा उमाकांत महाराज ने मानव जीवन के आध्यात्मिक उद्देश्य, युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, सनातन धर्म के वास्तविक स्वरूप और गौ संरक्षण जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि नशामुक्त, शाकाहारी और आध्यात्मिक समाज ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बन सकता है।

बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि ईश्वर ने मानव शरीर जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु और आकाश जैसे पंचतत्वों से बनाया है। मानव जीवन का उद्देश्य समरथ गुरु के मार्गदर्शन में आध्यात्मिक साधना कर जन्म-मरण के चक्र रूपी भवसागर से पार होना है। उन्होंने कहा कि सत्संग और संतों के सानिध्य से दूर होने के कारण लोगों के खान-पान, आचरण और विचारों में गिरावट आई है, जिससे समाज में ईर्ष्या, वैमनस्य, बीमारियां और अशांति बढ़ रही है।

उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश का भविष्य माने जाने वाले युवा यदि नशे की गिरफ्त में रहेंगे तो राष्ट्र निर्माण प्रभावित होगा। शराब और अन्य नशे अपराध, पारिवारिक विघटन और सामाजिक अव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छी संगत, सत्संग और वैचारिक परिवर्तन के माध्यम से ही युवाओं को सही दिशा दी जा सकती है। ‘जयगुरुदेव’ नाम के स्मरण और साधना से भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों प्रकार के लाभ मिलते हैं।

इसके अलावा गौ संरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक संगठनों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों को एकजुट होकर गृह मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से देशभर में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि उनका संकल्प है कि गौ हत्या पूरी तरह बंद होने के बाद ही वे हरिद्वार की हर की पौड़ी पर स्नान करेंगे।

सनातन धर्म की व्याख्या करते हुए बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि इसका वास्तविक उद्देश्य जीवात्मा को जन्म-मरण के बंधन और 84 लाख योनियों के चक्र से मुक्त कर मोक्ष की प्राप्ति कराना है। उन्होंने कहा कि अशुद्ध खान-पान और विकृत जीवनशैली से काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसी प्रवृत्तियां बढ़ती हैं, जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए घातक हैं।

उन्होंने भविष्य की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाला समय कठिन हो सकता है। ऐसे में साधना शिविर, नामधूनी शिविर तथा शाकाहार एवं नशामुक्ति अभियान समाज को सही दिशा देने का माध्यम बनेंगे। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी देशवासियों से शाकाहारी, सदाचारी, नशामुक्त, चरित्रवान और ईश्वरवादी जीवन अपनाने का आह्वान किया।

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