जयपुर। महामना मालवीय मिशन, जयपुर की ओर से माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर, मानसरोवर में “गीता की दृष्टि में जीवन की सफलता व सार्थकता” विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित की गई। मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त गीता चिंतक कृष्ण कांत महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति “साधन” नहीं, बल्कि “संबंध” प्रधान है और जीवन के निर्णय संबंधों को प्राथमिकता देते हुए लेने चाहिए।
उन्होंने गीता के चार प्रमुख संदेश बताते हुए कहा कि पहले दूसरों की बात ध्यान से सुनें, दोनों पक्षों को समझने के बाद निर्णय लें, मोह या भावनाओं में बहकर निर्णय न करें तथा संबंधों को सर्वोच्च महत्व दें। उनके लगभग डेढ़ घंटे के उद्बोधन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मिशन के अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया और आयोजन में सहयोग देने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिशंकर सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री वेद प्रकाश, महासचिव अर्चना गुप्ता सहित दिल्ली मुख्यालय के पदाधिकारियों का आभार जताया। अर्चना गुप्ता ने जयपुर इकाई की सराहना करते हुए बताया कि व्याख्यानमाला का आयोजन अब आगरा और लखनऊ में भी होगा।
इस अवसर पर मिशन दिल्ली द्वारा प्रकाशित ‘मिशन संदेश’ (अप्रैल-जून 2026) का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन, वंदे मातरम् और बीएचयू कुलगीत के साथ हुआ।



















