विशेष संयोग में सावन की दुर्गाष्टमी पर की शिव-शक्ति की आराधना

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जयपुर। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी गुरुवार को मासिक दुर्गाष्टमी के रूप में मनाई गई। श्रद्धालुओं ने आदिशक्ति के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना की। श्रद्धालुओं ने सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लिया। पूजा स्थल की सफाई कर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की। भक्तिभाव से माता को रोली, अक्षत, सिंदूर, लाल चुनरी और श्रृंगार सामग्री अर्पित की।

लाल कनेर और गुड़हल के फूल चढ़ाकर घी का दीपक जलाया। फल, मेवे, हलवे या खीर का भोग लगाया। मंत्र का जाप करने के साथ दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। आरती कर परिवार के कल्याण की प्रार्थना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गाष्टमी पर व्रत रखकर मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। सुबह से ही मंदिरों और घरों में मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने देवी मंत्रों का जाप, दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया।

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