श्रीमद्भागवत कथा में वामन अवतार: राम जन्म और कृष्ण जन्मोत्सव की बही भक्ति धारा

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जयपुर। भाटिया बिरादरी की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में बुधवार को कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। कथा के दौरान वामन अवतार, भगवान श्रीराम जन्म, भगवान श्रीकृष्ण जन्म एवं नन्द महोत्सव के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। श्रद्धालु भक्ति गीतों और जयकारों के साथ कथा रस में डूबे नजर आए।

व्यासपीठ से सुरेश जी शास्त्री ने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान कभी भी भक्त का अहित नहीं करते, बल्कि उसके भीतर छिपे अहंकार को समाप्त कर उसे सही मार्ग दिखाते हैं। दैत्यराज बलि के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने कहा कि मनुष्य को धन, पद और शक्ति का अभिमान नहीं करना चाहिए। विनम्रता और सेवा भाव अपनाने वाले व्यक्ति पर सदैव भगवान की कृपा बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि आज मनुष्य के पास संसाधन तो बहुत हैं, लेकिन शांति नहीं है, क्योंकि वह भगवान से दूर होता जा रहा है। कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए होती है।

भगवान श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए शास्त्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन से मर्यादा, त्याग, माता-पिता की सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि यदि परिवार में राम जैसे संस्कार आ जाएं तो घर स्वयं अयोध्या बन जाता है।

जैसे ही श्रीराम जन्म का वर्णन हुआ, पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर प्रभु का स्वागत किया और भक्ति गीतों पर झूम उठे।
आचार्य शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन से क्रोध, लोभ और अहंकार का त्याग कर प्रेम, धैर्य और सेवा भाव अपनाना चाहिए। जिस घर में प्रतिदिन भगवान का स्मरण होता है, वहां नकारात्मकता कभी नहीं टिकती।

कार्यक्रम अध्यक्ष अजय गांधी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान कथा स्थल पूरी तरह उत्सवमय हो उठा। शास्त्री ने अपने प्रवचनों में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराकर धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने प्रेम, मित्रता और कर्मयोग का संदेश देकर मानवता को जीने की कला सिखाई।

श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल “नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से गूंज उठा। नन्द महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने भजनों पर नृत्य कर उत्सव मनाया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए तथा बच्चों ने कान्हा स्वरूप धारण कर सभी का मन मोह लिया। इस दौरान खिलौनों, फल और सूखे मेवों की उछाल की गई तथा माखन-मिश्री और प्रसाद का वितरण किया गया।

इस अवसर पर शास्त्री ने कहा कि भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य के पास समय तो है, लेकिन भगवान के नाम जप और सेवा के लिए समय नहीं निकाल पाता। यदि प्रतिदिन कुछ समय प्रभु स्मरण, सत्संग और सकारात्मक विचारों के लिए निकाला जाए तो जीवन की अनेक परेशानियां स्वतः समाप्त होने लगती हैं।

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