44 लाख के लोन की ईएमआई के तनाव में महिला ने फंदा लगाकर की खुदकुशी

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जयपुर। महेश नगर थाना क्षेत्र में नए मकान के लोन की ईएमआई चुकाने की चिंता में एक 35 वर्षीय महिला ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका मनीषा के नाम पर परिवार ने हाल ही में 44 लाख रुपए का लोन लेकर 49 लाख रुपए में 86 गज का मकान खरीदा था। लोन की पहली किस्त आगामी 15 अगस्त को जमा होनी थी। परिवार देवउठनी एकादशी पर नए घर में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहा था,लेकिन खुशियों के आगमन से पहले ही घर में मातम पसर गया।

एएसआई महेंद्र सिंह ने बताया कि मूलतः सवाई माधोपुर जिले के बामनवास (बड़ोली) क्षेत्र की रहने वाली मनीषा (35) अपने पति ओमप्रकाश और दो बेटों शिवम (12) व कुशाल (10) के साथ करतारपुरा की महावीर कॉलोनी में किराए के मकान में रह रही थी। पति ओमप्रकाश जयपुर में मूर्ति बनाने का काम करते हैं। मनीषा और ओमप्रकाश की शादी वर्ष 2011 में हुई थी।

बुधवार देर शाम मनीषा ने पति और दोनों बच्चों के साथ चाय पी। इसके बाद पति ओमप्रकाश अपना मोबाइल ठीक करवाने महेश नगर चले गए। पति के जाने के बाद मनीषा ने दोनों बच्चों को बाहर खेलने भेज दिया और कमरे की कुंडी अंदर से बंद कर अपनी साड़ी से पंखे पर फंदा लगा लिया। जब ओमप्रकाश घर लौटे तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने और फोन करने पर भी जब कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने दरवाजा तोड़ दिया।

अंदर मनीषा फंदे से लटकी हुई मिली। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और परिजनों की मौजूदगी में शव को फंदे से नीचे उतारा। गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पति ओमप्रकाश के अनुसार 8 दिन पहले ही हाथोज स्थित मकान की रजिस्ट्री मनीषा के नाम करवाई गई थी, लेकिन लोन लेने के बाद से ही वह किस्त चुकाने को लेकर बेहद तनाव में रहती थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बैंक यूनियन प्रेसिडेंट महेश मिश्रा ने बताया कि नियमानुसार लोन लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु होने पर लोन की जिम्मेदारी नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) या वारिस की होती है। हालांकि, यदि लोन के साथ होम लोन इंश्योरेंस करवाया गया है और मृत्यु की परिस्थिति पॉलिसी के नियमों के तहत आती है, तो बीमा कंपनी द्वारा क्लेम सेटलमेंट के बाद बकाया लोन माफ हो जाता है।

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