जयपुर में विशाल 40 कुंडीय महायज्ञ में 108 जोड़ों ने दी आहुति

0
29
108 couples offered oblations at a grand 40-kund Mahayajna in Jaipur.
108 couples offered oblations at a grand 40-kund Mahayajna in Jaipur.

जयपुर। हिन्द सिंध के महान संत युगपुरुष आचार्य श्री सद्गुरु स्वामी टेऊँराम महाराज के पावन ‘चालीहा महोत्सव’ के उपलक्ष्य में साप्ताहिक जन्मोत्सव के शुभ शनिवार पर एक विशाल 40 कुंडीय यज्ञ अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इस भव्य महायज्ञ में 108 जोड़ों ने सामूहिक रूप से आहुति देकर विश्व कल्याण की मंगल कामना की।

चालीहा उत्सव में ’40’ के अंक का है विशेष महत्व

40 दिन तक चलने वाले इस महोत्सव की महिमा पर प्रकाश डालते हुए पूज्य स्वामी मोहन प्रकाश महाराज ने बताया कि सनातन और सिंधी संस्कृति में ’40’ के अंक का विशेष महत्व है। चालीहा के दौरान 40 दिन तक निरंतर नाम जप, हवन-यज्ञ अनुष्ठान, व्रत-उपासना, परोपकार व सेवा कार्य और मंदिर दरबार के दर्शन करना विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

उन्होंने पौराणिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि आचार्य सतगुरू स्वामी टेऊँराम की माता कृष्ण देवी को भी 40 दिन की कठिन व्रत-उपासना के बाद ही आचार्य श्री के रूप में दिव्य संतान की प्राप्ति हुई थी। महायज्ञ के दौरान 11 विद्वान पंडितों और वेदाचार्यों के मुख से निकले ओजस्वी मंत्रोच्चारण के बीच 40 मिनट तक आहुतियाँ डाली गईं।

संतों के अनुसार, इस अनुष्ठान से वातावरण में गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक परिवर्तन देखा गया। हवन कुंड से निकलने वाली ध्वनि तरंगें और औषधीययुक्त सुगंध ने मिलकर आसपास की वायु को शुद्ध और पवित्र किया, जिससे वहाँ उपस्थित श्रद्धालुओं के मस्तिष्क और मन को असीम शांति व एकाग्रता मिली। संतों ने बताया कि प्राचीन काल में भी ऋषि-मुनियों द्वारा मौसम परिवर्तन, मनोकामना पूर्ति और विश्व कल्याण के लिए ऐसे ही यज्ञ अनुष्ठान किए जाते थे।

शनिवार सुबह 6 बजे से प्रारंभ हुए इस अनुष्ठान में एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। मान्यता है कि शुभ कार्यों में स्वयं इंद्र देव आशीर्वाद देने आते हैं और इस यज्ञ में भी ऐसा ही हुआ। सुबह से ही नन्ही-नन्ही बूंदों के रूप में इंद्र देव ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और महायज्ञ की पूर्णाहूति तक बरसकर अनुष्ठान को सफल बनाने का आशीर्वाद दिया। इस विशाल महायज्ञ अनुष्ठान में स्वामी मनोहर लाल महाराज, संत मोहन लाल महाराज, संत नवीन,संत हरीश,संत झामन दास,संत अविनाश ऋषि भरत पुनीत सहित कुल 11 संत महात्मा और अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इस महोत्सव की अगली कड़ी में सद्गुरु स्वामी टेऊँराम महाराज का 84वाँ वरसी उत्सव 16 जून से 20 जून तक ‘श्री अमरापुर स्थान’, जयपुर में पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। इस वरसी उत्सव में प्रेम प्रकाश ग्रंथ एवं गीता जी के पाठ साहब, सत्संग, भव्य आरती और ‘सतनाम साक्षी’ मंत्र का सामूहिक जाप, सामूहिक चालीसा पाठ और स्वामी जी की ‘सोलह शिक्षाएं’ व प्रार्थना के साथ 20 जून शनिवार को संतों का विशेष सत्संग, ग्रंथ व गीता जी के पाठों का परायण, कुष्ठ आश्रम में भोजन सेवा तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here