गणगौर का पर्व: माता गौरी और ईसर के आशीर्वाद का प्रतीक, 4 मार्च से शुरू होगा 16 दिवसीय उत्सव

0
58

जयपुर। राजस्थान में गणगौर का पर्व मातृ और दैवीय आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व माता गौरी (पार्वती) और ईसर (भगवान शिव) को समर्पित है। सुहागिन महिलाएं अपने दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से, जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की इच्छा से यह व्रत करती हैं।

हिंदू परंपरा में गणगौर सुहाग, श्रद्धा और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। आगरा गेट स्थित गणेश मंदिर के पुरोहित पंडित घनश्याम आचार्य के अनुसार, वर्ष 2026 में पूर्णिमा और प्रतिपदा तिथि का संयोग 4 मार्च को होने से इसी दिन ईसर-गणगौर पूजन का शुभारंभ होगा। इस दिन भाग्य और सौभाग्य की कामना हेतु महिलाएं व्रत रखती हैं और कुंवारी कन्याएं माता गौरी की पूजा कर योग्य वर प्राप्त करने का आशीर्वाद पाती हैं।

गणगौर पर्व की विशेषता 16 दिवसीय साधना और सोलह श्रृंगार में है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 16 दिनों तक कठोर तपस्या की। उनकी इसी अटूट श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इसी कारण से यह पर्व 16 दिनों तक मनाया जाता है।

हिंदू परंपरा में 16 अंक को पूर्णता और शुभता का प्रतीक माना गया है। गणगौर पूजा में 16 प्रकार की पूजन सामग्री, 16 बार काजल/रोली/मेहंदी से बिंदियां लगाना, 16 व्यंजनों का भोग और सोलह श्रृंगार करना माता गौरी की कृपा और अखंड सौभाग्य की कामना से किया जाता है।

पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव की प्रतिमा बनाकर 15 दिनों तक कठोर तपस्या की। 16वें दिन उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद माता पार्वती की विदाई बड़े उत्सव और हर्षोल्लास के साथ हुई। यही परंपरा आज भी गणगौर पर्व में निभाई जाती है, जहां ईसर-गौरी की प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली जाती है। राजस्थान में ईसर को भगवान शिव और गणगौर को माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है।

राजस्थान में गणगौर की भव्यता

राजस्थान में गणगौर का पर्व विशेष रूप से भव्यता और उत्साह के साथ मनाया जाता है। जयपुर में शाही सवारी, उदयपुर में पिछोला झील किनारे सजी नावों की शोभा और बीकानेर में पारंपरिक शाही गणगौर इस पर्व को अद्वितीय पहचान देते हैं। लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा और रंग-बिरंगी सजावट पूरे माहौल को जीवंत और मनोहारी बना देती हैं।

वर्ष 2026 में गणगौर पूजा 4 मार्च से शुरू होकर 21 मार्च तक चलेगी, जब चैत्र शुक्ल तृतीया को विधि-विधान और शोभायात्रा के साथ इस पर्व का समापन होगा। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं का जीवंत उत्सव भी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here