जयपुर। माली-सैनी समाज ने मांगा अलग 12 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर राज्य भर से आए समाज के लोगों ने विधानसभा के पास प्रदर्शन किया और धरना दिया। बाद में विधानसभा में मुख्यमंत्री भजनलाल से फोन से आश्वासन मिलने और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक वार्ता होने के बाद आरक्षण आंदोलन स्थगित कर दिया।
इस घेराव और प्रदर्शन में प्रदेश भर से आए सैनी समाज के हजारों लोग शामिल हुए। आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर माली, सैनी, कुशवाह, शाक्य, मौर्य व सुमन समाज के सैकड़ों लोग 11 सूत्रीय मांगों को लेकर राजस्थान के गांव-गांव, कस्बों व शहरों से जन अधिकार यात्रा जयपुर पहुंची।
यात्रा का नेतृत्व कर रहे संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष सीपी सैनी ने बताया कि भरतपुर से शुरू हुई जन अधिकार यात्रा में पूरे प्रदेश भर से लोग अपना हक मांगने के लिए आएंगे। उन्होंने बताया कि माली-सैनी समाज की मांग आज तक नहीं सुनी गई जबकि प्रदेश की सौ से अधिक विधानसभा सीटों पर समाज के वोटर भारी तादाद में है। पूर्व में भी गहलोत सरकार के समय भी हमें खाली आश्वासन मिला और असलियत में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
यात्रा घाट की गूणी, आगरा रोड सीकर रोड, अजमेर रोड, कोटा राजमार्गों से होती हुई विधानसभा के पास बाइस गोदाम पहुंच कर सभा में बदल गई। शाम तक समाज के नेताओं ने जाम लगाने का फैसला किया। साथ ही सीएम से वार्ता की मांग रखी। शाम को 7 बजे समाज के प्रतिनिधिमंडल को विधानसभा में बुलाया गया।
वहां सीएम भजनलाल से फोन पर बातचीत कराई। उन्होंने होली के बाद मुख्यमंत्री निवास पर बैठक करने का वादा किया। साथ ही सामाजिक न्याय एवं बाल आधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत व भाजपा विधायक भागचंद टांकड़ा के साथ बाकायदा बैठक हुई।
आरक्षण संघर्ष समिति के महामंत्री विनोद भूदोली ने बताया की सरकार से कमेटी से सकारात्मक वार्ता हुई हैं यदि सरकार हमसे हुई वार्ता पर खरी नही उत्तरती हैं अबकी बार निश्चित रूप से आर पार की लड़ाई लड़ी जाएंगी। आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष सी पी सैनी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इधर आरक्षण के लिए कमेटी गठित करने का आश्वासन दिया।
फुले बोर्ड व लवकुश बोर्ड की बहाली के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई जाएंगी। सैनी रेजिमेंट के गठन के लिए सेना से डाटा लिए जाएंगे।
महात्मा ज्योतिबा फुले दंपति को भारत रत्न दिलाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा जाएंगा। आंदोलनों के दौरान लगें मुकदमे वापस लेने के लिए कमेटी गठित कर गुर्जर आंदोलन के तर्ज पर हटाएं जाएंगे।



















