जयपुर। राजस्थान में सोमवार देर रात तक होलिका दहन होगा। जिलों में मुहूर्त अलग-अलग रहेगा, जबकि जयपुर में 2 मार्च की रात 1:26 बजे से 2:38 बजे के बीच भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन किया जाएगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार भद्रा के मुख में दहन वर्जित और पुच्छ में श्रेष्ठ माना गया है, इसी आधार पर प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आयोजन तय किए गए हैं।
परंपरा के अनुसार सबसे पहले गोविंद देव जी मंदिर और सिटी पैलेस जयपुर में होलिका दहन होगा। सिटी पैलेस में रात 1:26 बजे पारंपरिक कार्यक्रम की शुरुआत होगी। पूर्व राजपरिवार के सदस्य सवाई पद्मनाभ सिंह पूजा-अर्चना के बाद होलिका प्रज्वलित करेंगे। इसके बाद श्रद्धालु पवित्र अग्नि को अपने-अपने मोहल्लों में ले जाकर दहन करेंगे।
शहर में महिलाओं ने शाम को होलिका की पूजा की। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा व यातायात के विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालु निर्धारित समय पर पूजा-अर्चना कर सकें।
3 मार्च को 4 घंटे 26 मिनट रहेगा चंद्रग्रहण
3 मार्च को सत्यनारायण पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण रहेगा। सूतक सूर्योदय के साथ सुबह करीब 6:55 बजे से प्रभावी होगा। ग्रहण पर्वकाल दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। कुल अवधि 4 घंटे 26 मिनट की होगी।
ग्रहण के कारण मंदिरों की दर्शन व्यवस्था में बदलाव रहेगा। मंगला झांकी सुबह 4:00 से 6:30 बजे तक, धूप दर्शन 7:00 से 8:45 बजे तक, श्रृंगार 9:30 से 10:15 बजे तक और राजभोग 10:45 से 11:30 बजे तक होंगे। ग्रहणकाल विशेष दर्शन दोपहर 3:15 से शाम 6:50 बजे तक रहेंगे। इसके बाद ग्वाल, संध्या और शयन दर्शन नहीं होंगे।
भीड़ को देखते हुए 3 और 4 मार्च को देवउठनी एकादशी व दीपावली की तर्ज पर व्यवस्था रहेगी। प्रवेश जलेब चौक से और निकास जय निवास उद्यान से होगा। विशेष दर्शन के बाद नियमित दर्शन 4 मार्च को मंगला झांकी से पुनः शुरू होंगे।



















