जयपुर। डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बीच गलत यूपीआई ट्रांजैक्शन की घटनाओं को देखते हुए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने बताया कि जल्दबाजी या गलत नंबर टाइप होने के कारण कई बार पैसा किसी अनजान व्यक्ति के खाते में चला जाता है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय समय रहते सही कदम उठाने से राशि वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के अनुसार जैसे ही यह पता चले कि पैसा गलत खाते में चला गया है, सबसे पहले उस ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट सुरक्षित कर लें और यूटीआर नंबर नोट कर लें। यह 12 अंकों का नंबर ही ट्रांजेक्शन को ट्रैक करने और राशि की रिकवरी में सबसे महत्वपूर्ण होता है।
इसके बाद संबंधित यूपीआई ऐप जैसे गूगल पे, फोनपे या पेटीएम की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री में जाकर ““समस्या की रिपोर्ट करें” या “विवाद उठाएँ का विकल्प चुनकर तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इससे बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को ट्रांजेक्शन ट्रैक करने में आसानी होती है।
तीसरे चरण में उपभोक्ता को अपने बैंक की नजदीकी शाखा में जाकर या कस्टमर केयर से संपर्क कर गलत ट्रांजेक्शन की सूचना देनी चाहिए। बैंक को लाभार्थी की यूपीआई आईडी, ट्रांजेक्शन का समय और राशि का विवरण लिखित में देने से प्रक्रिया तेज हो जाती है।
यदि ऐप या बैंक स्तर पर संतोषजनक समाधान नहीं मिले तो उपभोक्ता नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पोर्टल और हेल्पलाइन 1800-120-1740 पर संपर्क कर सकते हैं।
साइबर क्राइम शाखा ने पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार आमजन से अपील की है कि डिजिटल भुगतान करते समय विशेष सावधानी बरतें।
भुगतान से पहले मोबाइल नंबर या क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद दिखाई देने वाले नाम को दोबारा जांचें और किसी अनजान व्यक्ति के दबाव या कॉल पर तुरंत भुगतान न करें। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि पैसा प्राप्त करने के लिए कभी भी पिन डालने या क्यूआर कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होती।



















