जयपुर। जवाहर कला केंद्र की अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. अनुराधा गोगिया की उपस्थिति में राजस्थान दिवस के अवसर पर जवाहर कला केंद्र की ओर से विभिन्न अकादमियों के सहयोग से आयोजित किया जा रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में सोमवार को सायं 6:00 बजे से जवाहर कला केन्द्र के केन्द्र के रंगायन सभागार में रजब अली भारती द्वारा गीत एवं गज़ल की प्रस्तुति दी गई। इसके पश्चात तथा पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित हुसैन बंधु (उस्ताद अहमद हुसैन एवं उस्ताद मोहम्मद हुसैन) की भजन गायन की प्रस्तुति दी।
जवाहर कला केंद्र की अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. अनुराधा गोगिया ने इस अवसर पर कलाकारों का शॉल उढाकर स्वागत किया। इस अवसर पर सिविल लाइन विधायक गोपाल शर्मा, गजल गायकी के सम्राट स्वर्गीय जगजीत सिंह के बड़े भाई जसवंत सिंह भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में राजस्थान में जन्मे विश्वप्रसिद्ध ग़ज़ल गायक पद्मश्री उस्ताद अहमद हुसैन एवं उस्ताद मोहम्मद हुसैन ने शास्त्रीय संगीत आधारित “गाइये गणपति जगवंदन, शंकर सुवन भवानी के नंदन” की सुमधुर प्रस्तुति दी। गोस्वामी तुलसीदासजी कृत उक्त स्तुति के साथ ही श्री राधागोविंद देव जी की स्तुति “अब राधेरानी दे डारो बंसी मोरी” की भक्तिमय प्रस्तुति से श्रोताओं को मन्त्रमुग्ध कर दिया। वहीं उन्होंने “चल मेरे साथ ही चल” गज़ल से भी सुरों बानगी पेश की।
उस्ताद अहमद हुसैन एवं उस्ताद मोहम्मद हुसैन की जुगलबंदी दी गई प्रस्तुति और बेहतरीन शेर शायरी ने भी सुरीला समां बाँध दिया।
इससे पूर्व कार्यक्रम के पहले चरण जवाहर कला केन्द्र में आयोजित इस खूबसूरत गज़ल गायकी की शाम का आगाज़ रजब अली भारती ने राजस्थान की सुप्रसिद्ध मांड “केसरिया बालम” की प्रस्तुति के साथ किया। इसके बाद उन्होंने लोकप्रिय गजल “रंजिशे ही सही” सुमधुर प्रस्तुति दी। इस दौरान प्रसिद्ध कलाकार मनभावन डांगी के वायलिन वादन के साथ अन्य वाद्य यन्त्रों की भी बेहतरीन प्रस्तुतिया रही।
रजब अली ने जगजीत सिंह, गुलाम अली और मेहदी हसन की मशहूर ग़ज़लों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। जिसमें “कोई फ़रियाद तेरी दिल में दबी हो जैसे, जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे, हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है।” की सुरीली प्रस्तुति दी। इसके साथ ही *”हंगामा है क्यों गरपा” की शुरुआत से ही दर्शकों ने रिदम के साथ तालिया बजाते हुए गायक की हौसला अफ़ज़ाई की।
इसके बाद गज़ल “हम तेरे शहर में आए हैं, मुसाफिर की तरह” और “चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है” जैसी गज़लों की प्रस्तुति पर गायक रजब अली ने दर्शकों की खूब वाह-वाही और तालियां बटोरी। वहीं अमीर खुसरों का प्रसिद्ध कलाम “छाप तिलक की रूहानी प्रस्तुति पर भी गज़ल गायक रजब अली को श्रोताओं से खूब वाहवाही मिली।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कला एवं संगीत प्रेमियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। इस अवसर पर बेहतरीन श्रोताओं की उपस्थिति की शेर-शायरी के माध्यम से मंच से सराहना की गई।
जवाहर कला केंद्र अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. अनुराधा गोगिया ने बताया कि राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा केन्द्र की सुरेख कला दीर्घा में सोमवार को ही एक चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया।
जवाहर कला केंद्र पर 17 मार्च को आयोजित होने वाले कार्यक्रम
जवाहर कला केंद्र अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. अनुराधा गोगिया ने बताया कि जवाहर कला केंद्र पर 17 मार्च मंगलवार को राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर द्वारा तीन दिवसीय प्रदर्शनी का अलंकार कला दीर्घा में शुभारम्भ किया जाएगा।जिसमें ऐतिहासिक अभिलेखों एवं दुर्लभ दस्तावेजों का प्रदर्शन किया जाएगा।
राजस्थान दिवस समारोह के अंतर्गत मंगलवार (17 मार्च) को जवाहर कला केन्द्र रंगायन सभागर में ‘प्रसिद्ध एब्सट्रेक्ट आर्टिस्ट स्व. ज्योति स्वरूप का कृतित्व और व्यक्तित्व’ पर शाम 5:00 बजे से 6:00 बजे तक विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जवाहर कला केन्द्र के मध्यवर्ती में मंगलवार शाम (17 मार्च) को पर्यटन विभाग के तत्वाधान में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से नाट्य प्रस्तुति ‘समुद्र मंथन’ का शाम 7:00 बजे से मंचन किया जाएगा।जिसकी परिकल्पना और निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने है।




















