जयपुर। राजस्थान में नशे के काले कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने 7 साल से फरार और 40 हजार रुपए के इनामी तस्कर राजूराम उर्फ राजेश (40) को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई 6 महीने लंबे ‘ऑपरेशन जेंटल-मेंटल’ के तहत की गई, जिसे अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस दिनेश एम.एन. के निर्देशन और आईजी विकास कुमार के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।
आईजी विकास कुमार के अनुसार आरोपी को बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गय। जहां वह अपने परिवार से मिलने आया था और एक झोपड़ी में छिपा हुआ था। आरोपी राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश में एमडी ड्रग्स की सप्लाई चेन का मुख्य सरगना बना हुआ था।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने नशे के कारोबार को पूरी तरह कॉर्पोरेट ढांचे में संगठित कर रखा था। वह खुद को ‘मार्केटिंग सीईओ’ बताता था, जबकि कोलकाता से पकड़ा गया तस्कर रमेश ‘प्रोडक्शन हेड’ के रूप में काम करता था। नेटवर्क में फैक्ट्री मैनेजर और अकाउंटिंग हेड जैसे पद भी बनाए गए थे।
राजस्थान के जोधपुर, बाड़मेर, जालोर और सांचौर क्षेत्रों में उसकी एक दर्जन से अधिक एमडी फैक्ट्रियां संचालित होने की जानकारी सामने आई है। यहां से तैयार माल सीधे थोक विक्रेताओं तक पहुंचाया जाता था।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अब तक करीब 100 करोड़ रुपए मूल्य का एमडी ड्रग्स बाजार में खपा चुका है। प्रति किलो एमडी पर करीब 15 लाख रुपए तक मुनाफा कमाया जाता था।
करीब 12 साल पहले आरोपी ने अवैध शराब तस्करी से अपराध की दुनिया में कदम रखा था, जहां उसे 15 हजार रुपए प्रति ट्रिप मिलते थे। बाद में अफीम और डोडा-चूरा तस्करी में जुड़कर कमाई बढ़ी और अंततः एमडी नेटवर्क से जुड़कर बड़ा तस्कर बन गया।
आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए गांव में मुखबिरों का नेटवर्क तैयार कर रखा था। सूचना मिलते ही वह खेतों के रास्ते फरार हो जाता था। तीन बार पहले भी पुलिस कार्रवाई के दौरान भाग निकलने में सफल रहा था।
इस बार भी उसने एएनटीएफ को गुमराह करने के लिए अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी में गुर्गों को भेज दिया और खुद झोपड़ी में छिपा रहा। पुलिस ने वाहन का पीछा करने के बजाय उसकी एक करीबी महिला मित्र पर नजर रखी, जो उसे खाना देने जा रही थी। इसी आधार पर लोकेशन ट्रैक कर टीम ने आरोपी को धर दबोचा।
आरोपी तंत्र-मंत्र और जादू-टोने में गहरा विश्वास रखता था। वह हर अमावस्या पर उत्तराखंड के कैंची धाम और हरिद्वार जाता था। दो माह पूर्व हरिद्वार के पास एएनटीएफ से मुठभेड़ के दौरान भी वह भागने में सफल रहा था।
चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी का पिता होमगार्ड में तैनात है, लेकिन आरोपी ने इसी का फायदा उठाकर वर्षों तक पुलिस से बचाव किया। उसने अपने रिश्तेदारों को भी इस नेटवर्क में शामिल किया, जिसमें उसका बहनोई मांगीलाल फैक्ट्री मैनेजर के रूप में काम करता था।
एएनटीएफ ने इस अभियान का नाम ‘ऑपरेशन जेंटल-मेंटल’ आरोपी की दोहरी छवि के आधार पर रखा। वह सामाजिक रूप से खुद को ‘जेंटल’ दिखाता था, जबकि अपराध जगत में उसकी छवि ‘मेंटल’ यानी असामान्य सोच रखने वाले व्यक्ति की थी।
आईजी विकास कुमार के अनुसार राज्य में एमडी जैसे घातक नशे के कारोबार को खत्म करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा और इसमें शामिल किसी भी तस्कर को बख्शा नहीं जाएगा।



















