सवर्ण समाज महापंचायत में दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

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जयपुर। यूजीसी के भेदभाव पूर्ण कानून के विरोध में सवर्ण समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को राम निवास गार्डन में फुटबॉल क्लब ग्राउंड पार्किंग स्थल पर सवर्ण समाज महापंचायत का आयोजन किया गया।

महापंचायत स्थल भेदभावपूर्ण नीतियों के विरोध में लगाए जा रहे तीखे नारों से गूंज उठा। युवाओं का जोश और आक्रोश उनके चेहरों पर साफ झलक रहा था। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में अपनी उपेक्षा और भविष्य को लेकर गहरी चिंता जताई।

महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सवर्ण समाज को योजनाबद्ध तरीके से हाशिये पर धकेला जा रहा है। शिक्षा, रोजगार और नीतिगत फैसलों में लगातार हो रहे भेदभाव को लेकर लोगों में असंतोष चरम पर है। यूजीसी रोलबैक सहित अन्य मुद्दों पर जोरदार आवाज बुलंद की गई और स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो इससे भी बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

राष्ट्रीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कौशिक ने अपने संबोधन में कहा कि अब सवर्ण समाज चुप बैठने वाला नहीं है। हमारी सहनशीलता को कमजोरी समझने की भूल न करें। यदि हमारे अधिकारों पर चोट की गई तो सडक़ों पर ऐसा आंदोलन खड़ा होगा, जो व्यवस्था को झकझोर देगा। यूजीसी जैसे फैसलों को तुरंत वापस लेना होगा, नहीं तो देशव्यापी उग्र आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा।

परशुराम सेना के अध्यक्ष दिनेश राणेजा ने कहा कि यह संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर है। यह केवल सवर्ण समाज की नहीं, बल्कि न्याय और समानता की लड़ाई है। अगर हमारी मांगों को अनदेखा किया गया तो यह महापंचायत एक चेतावनी है—आने वाले समय में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे।

श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है। बार-बार सवर्ण समाज को नजरअंदाज करना भारी पड़ेगा। यह समाज जब उठ खड़ा होता है तो हालात बदल देता है। हम शांत हैं, लेकिन अगर मजबूर किया गया तो आंदोलन का स्वरूप बेहद उग्र होगा।

शांभवी पीठ पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि समाज में बढ़ती असमानता राष्ट्र के लिए खतरा है। जब तक सभी वर्गों को समान अवसर नहीं मिलेगा, तब तक देश मजबूत नहीं हो सकता। सवर्ण समाज के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है।

कार्यक्रम में धर्मेन्द्र शर्मा, भुनेश पंडित, सतीश तिवारी, अमन भारद्वाज, सुधांशु पंडित मानोता एवं दामोदर शर्मा सहित कई वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे और संघर्ष को और तेज करने का आह्वान किया।

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