जयपुर। शुक्ल योग, ब्रह्म योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे दुर्लभ और अत्यंत मंगलकारी संयोगों में गुरुवार को चैत्र के वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ हुआ। घर-घर में घट स्थापना के साथ नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू हुआ। छोटीकाशी के सभी मंदिरों एवं सनातन धर्मावलंबियों के घरों में विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना शुरू हुई।
ज्यादातर लोगों ने अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना कर पूजा-अर्चना की। नवरात्र में माता का आगमन पालकी में हुआ है। विदाई भी पालकी में होगी। नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री को शक्ति, स्थिरता और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है। इस बार अष्टमी और नवमी का संयोग एक ही दिन पड़ेगा। पूरे नवरात्र में विभिन्न शुभ योग बन रहे हैं, जो व्रत और साधना करने वालों के लिए विशेष फलदायी माने जा रहे हैं।
शिव शक्ति हनुमान मंदिर- त्रिपोलिया बाजार
हिंदू नववर्ष नवसंवत्सर 2083 और नवरात्रि पर गुरुवार को त्रिपोलिया बाजार के तंवर जी का नोहरा स्थित शिव शक्ति हनुमान मंदिर में भक्तिभाव से घट स्थापना की गई।
मंदिर समिति के अध्यक्ष पं. तरुण भारती ने बताया कि नवसंवत्सर का शुभारंभ प्रात: सूर्योदय के समय घंटे-घडिय़ालों की मंगल ध्वनि के साथ हुआ। इस अवसर पर दुर्गा माता का पंचामृत अभिषेक कर विधि-विधान से घट स्थापना की गई। पं. दिनेश शर्मा के आचार्यत्व में विद्वानों ने दुर्गापाठ किए। नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों के लिए विशेष पूजा-अर्चना एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
दुर्गापुरा दुर्गा माता मंदिर
दुर्गापुरा स्थित प्राचीन दुर्गा माता मंदिर में महंत महेन्द्र भट्टाचार्य के सान्निध्य में प्रात: 7 बजे मंगल घट स्थापना की गई। फूलों से श्रृंगार कर मातारानी की आरती की गई। दुर्गा के सप्तशती पाठ किए गए। नवरात्र के दौरान मंदिर के पट प्रात: 6 से 12 बजे तक तथा शाम 5 से रात 9 बजे तक खुले रहेंगे।
दक्षिणमुखी बालाजी हाथोज धाम
श्री दक्षिणमुखी बालाजी हाथोज धाम में स्वामी बालमुकुंदाचार्य महाराज के सान्निध्य मेंं बसंत नवरात्र महोत्सव का शुभारंभ हुआ। घट स्थापना के साथ मंडल बनाकर देवताओं का पूजन किया गया। वाल्मीकि सुंदरकांड, दुर्गा सप्तशती पाठ, बगलामुखी मंत्र अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। रामनवमी को महाआरती एवं कन्या पूजन के साथ महोत्सव का समापन किया जाएगा।
रुद्रघंटेश्वरी महाकालिका मंदिर
सूरजपोल स्थित रुद्रघंटेश्वरी महाकालिका मंदिर में दोपहर को घट स्थापना की गई। माता का अलौकिक श्रृंगार कर भगवान शिव के 108 रुद्र नामों से युक्त 108 रुद्र घंटिकाओं की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
श्री खोले के हनुमान मंदिर
श्री खोले के हनुमान मंदिर में गुरुवार को चैत्र नवरात्रा के प्रथम दिन घट स्थापना सुबह 10 बजे की गई। इस दौरान लक्ष्मण डूंगरी का खोल रामचरित मानस की चौपाईयों से गूंजायमान रहा। बास बदनपुरा स्थित मुरली मनोहर मंदिर से 200 महिलाएं कलश लेकर श्री खोले के हनुमान मंदिर पहुंची।
कलश यात्रा के बाद वाल्मीकी रामायण की पूजा के बाद घट स्थापना की गई। घट स्थापना के साथ ही रामायण का पारायण प्रारंभ हो गए। अपराह्न काल में नवाह्न रामायण की पूजा हुई। शाम को 125 आसन से रामचरित मानस के संगीतमय सामूहिक पाठ हुए। पाठ नौ दिन चलेंगे।




















