महावीर जयंती का उल्लास- धूमधाम से निकली शोभायात्रा में गूंजा ‘जय महावीर-जय महावीर

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The Jubilation of Mahavir Jayanti
The Jubilation of Mahavir Jayanti

जयपुर। पूरी दुनिया को’ जीओ और जीने दो’ का दिव्य संदेश देने वाले, विश्ववंदनीय भगवान महावीर स्वामी का 2625 वां जन्म कल्याणक महोत्सव (जयन्ती समारोह) सोमवार को गुलाबी नगर में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर कॉलोनियों व शहर के जैन मंदिरों में प्रातः श्रीजी के अभिषेक,पूजा-अर्चना के बाद कई कालोनियों में प्रभात फ़ेरियां निकाली गई, वहीं शाम को महाआरती,भजनों व पालना झूलाने के विशेष आयोजन किए गए।

इस दौरान सुबह से ही शहर का चप्पा-चप्पा भगवान महावीर के जयकारों से गूंजता रहा। मुख्य आयोजन राजस्थान जैन सभा, जयपुर के तत्वावधान में वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ एवं व्याख्यान वाचस्पति आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में न्यूगेट के रामलीला मैदान पर हुआ। इस मौके पर ध्वजारोहण,दीप प्रज्ज्वलन, स्मारिका विमोचन, पहली बार 24 तीर्थंकरों के 24 पाण्डुक शिलाओं पर एक साथ कलशाभिषेक तथा 2625 चंवर एक साथ ढुलाने सहित धर्मसभा का भव्यता से आयोजन हुआ।

शोभायात्रा में गूंजते रहे त्रिशला नंदन के जयकारे:

शोभायात्रा में निकली एक दर्जन झांकियां और वीरा प्रभु के ये बोल… आज महावीर जयंती है … जैसे भजनों की स्वर लहरियों पर झूमता-नाचता भक्तों का समूह। कुछ ऐसा ही आंखों का सुकून पहुंचाने वाला दृश्य महावीर जयंती के अवसर पर परकोटे में निकली शोभायात्रा के दौरान देखने को मिला। यह शोभायात्रा मनिहारों का रास्ता स्थित महावीर पार्क से प्रातः 7 बजे शुरू हुई। बैंडबाजों व ज्ञानवर्धक व संदेशात्मक झांकियों से सुशोभित यह शोभायात्रा चौड़ा रास्ता,त्रिपोलिया बाजार, बड़ी चौपड़ ,जौहरी बाजार, बापू बाजार, न्यू गेट होती हुई रामलीला मैदान जाकर समाप्त हुई। शोभायात्रा के मार्ग में राज नेताओ एवं जगह जगह व्यापारिक,सामाजिक संस्थाओं ने पुष्प वर्षा व आरती उतारकर स्वागत व सत्कार किया।

शोभायात्रा में भगवान महावीर के जीवन चरित्र व सामयिक विषयों को लेकर निकली झांकियों जिनमें -भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव,अहिंसा से ही विश्व शांति, चोर बना भगवान महावीर जन्मोत्सव नारी शिक्षा व संस्कार वर्तमान का संकट वर्धमान ही समाधान भगवान महावीर पांच नाम एक संदेश, भगवान महावीर का बालपन, शिशु महावीर का पलना व पाण्डुक शिला पर अभिषेक, भगवान महावीर का जन्मोत्सव सहित अन्य विषयों पर आधारित झांकियों को लोग एकटक निहारते रहे। इस दौरान जिन-जिन मार्गों से यह शोभायात्रा गुजरी वे सभी मार्ग भक्ति और आस्था के रंग में सराबोर नजर आए।

24 तीर्थंकरों के 24 स्वर्णिम आभा युक्त रथ हुए शामिल

शोभायात्रा में पहली बार 24 तीर्थंकरों के 24 स्वर्णिम आभा युक्त रथ शामिल हुए जिन पर सौधर्म इन्द्र, सारथी, कुबेर सहित अन्य इन्द्र बैठे। 23 रथों के बाद आखिर में 24 वें रथ में भगवान महावीर की प्रतिमा स्वर्ण जड़ित रथ पर विराजमान थी । राजस्थान जैन सभा के कमेटी सदस्य व मुल्तान जैन समाज की भजन मण्डली आखिरी रथ के आगे भक्ति करते हुए चल रही थी। जौहरी बाजार में आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ एवं आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ससंघ का मिलन हुआ। दोनो संघ की 41 पिच्छीका शोभायात्रा में शामिल हुई।

महावीर पार्क से शुरू हुई यह शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई रामलीला मैदान पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।
घोड़े पर जैन ध्वज लेकर विजय सोगानी बैठे। शोभायात्रा में बैण्ड बाजे, हाथी, घोडे, ऊट,लवाजमा के साथ महिला मंडल की सदस्याए, विभिन्न स्कूलों के छात्र – छात्राएं, भजन मण्डलियां, बडी संख्या में श्रद्धालुगण नाचते गाते भक्ति में झूमते हुए शामिल हुए। शोभायात्रा का यह आलम था कि पहला छोर न्यू गेट था तब अंतिम छोर त्रिपोलिया बाजार में था। समाज की विभिन्न संस्थाओं एवं समाज बन्धुओं की ओर से पूरे मार्ग पर जैन धर्म का प्रतीक पचरंगा के 108 स्वागत द्वार लगाये गये थे। शोभायात्रा समिति एवं श्री वीर सेवक मण्डल जयपुर के कार्यकर्ताओं ने शोभायात्रा की व्यवस्था संभाली ।

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