स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने समझाए कृष्ण नीति के सूत्र

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Swami Govind Dev Giri Maharaj Explains the Principles of Krishna's Strategy
Swami Govind Dev Giri Maharaj Explains the Principles of Krishna's Strategy

जयपुर/ब्यावर। आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के केंद्र बांगुर नगर में आयोजित चार दिवसीय ‘कृष्ण नीति दर्शन कथा’ का सोमवार को भव्य समापन हुआ। श्री सीमेंट लिमिटेड की सीएसआर इकाई, श्री फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस आध्यात्मिक महाकुंभ ने न केवल ब्यावर, बल्कि आसपास के क्षेत्रों को भी कृष्णमय कर दिया। पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज के श्रीमुख से निसृत कृष्ण दर्शन और नीति के संदेशों ने श्रोताओं को जीवन प्रबंधन का नया मार्ग दिखाया।

हनुमान जन्मोत्सव और रथ यात्रा का आकर्षण

कथा के अंतिम दिन का विशेष आकर्षण श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर का वार्षिक उत्सव रहा। स्वामी जी के मार्गदर्शन में भगवान हनुमान की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बांगुर परिवार के सदस्यों ने हनुमान जी की प्रतिमा को रथ पर विराजित किया। इस शोभायात्रा में श्री सीमेंट के प्रबंध निदेशक नीरज अखौरी सहित वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और हजारों श्रद्धालुओं ने भक्ति संगीत की धुनों पर झूमते हुए भाग लिया। समापन अवसर पर मंदिर में विशेष पूजन, हवन और सामूहिक कल्याण के लिए आशीर्वाद लिया गया।

दिग्गज राजनेताओं और गणमान्य जनों का जमावड़ा

इस आध्यात्मिक संगम में कई बड़ी हस्तियों ने शिरकत की। पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे सिंधिया, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, अजमेर संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह राठौड़, जिला कलेक्टर कमलराम मीणा और एसपी रतन सिंह सहित प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। जनप्रतिनिधियों में मसूदा विधायक वीरेंद्र कानावत, ब्यावर विधायक शंकर सिंह रावत और डीडवाना विधायक यूनुस खान ने भी व्यासपीठ के दर्शन किए।

साथ ही आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम, क्षेत्रीय संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल, वीएचपी के नरपत सिंह शेखावत, राधेश्याम गौतम और सोजत से पधारे श्री बचनाराम जी महाराज सहित कई विशिष्ट जन उपस्थित रहे।

व्यापार के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का समन्वय

श्री सीमेंट के एमडी नीरज अखौरी ने कहा कि संस्था का दृष्टिकोण केवल व्यापारिक विकास तक सीमित नहीं है। हम समाज के सांस्कृतिक और नैतिक उत्थान के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। ऐसे आयोजन समाज में सामंजस्य और जिम्मेदारी की भावना पैदा करते हैं।

स्वामी जी का संदेश: कर्म ही धर्म

कथा के समापन पर स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने श्रीकृष्ण की नीतियों का सार समझाते हुए कहा कि फल की चिंता किए बिना कर्तव्य पथ पर अडिग रहना ही वास्तविक कृष्ण नीति है। उन्होंने ‘ज्ञान से जीवन दिशा और सेवा’ के सिद्धांत पर जोर देते हुए नैतिक नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा को जीवन का आधार बताया।

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