कथा-कहन की सृजन यात्रा : कानोता में तीन दिवसीय हिंदी नेस्ट कार्यशाला यादगार

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The Creative Journey of Storytelling: A Memorable Three-Day 'Hindi Nest' Workshop in Kanota
The Creative Journey of Storytelling: A Memorable Three-Day 'Hindi Nest' Workshop in Kanota

जयपुर। शहर के निकट कानोता कैंप में आयोजित तीन दिवसीय हिंदी नेस्ट कथा-कहन कार्यशाला का रविवार को सफल एवं प्रेरणादायी समापन हुआ। देशभर से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कहानी कहने की कला के विविध आयामों को सीखा और अपनी रचनात्मकता को नई दिशा दी।

इस वर्ष कार्यशाला का आयोजन प्रख्यात साहित्यकार रघुनंदन त्रिवेदी की स्मृति को समर्पित रहा, जिससे कार्यक्रम को विशेष भावनात्मक और साहित्यिक ऊंचाई मिली। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में रिसॉर्ट संचालक डॉ. बहादुर सिंह राठौड़ ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस कार्यशाला से प्रेरित होकर उन्होंने स्वयं दो पुस्तकें लिखीं। वरिष्ठ कथाकार मनीषा कुलश्रेष्ठ ने कहा, “कहानी सिखाई नहीं जाती, लेकिन रचनात्मकता का बीज जरूर बोया जा सकता है।” आयोजन से जुड़े कुश वैष्णव ने इसे छह वर्षों की निरंतर साधना का परिणाम बताया।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों की श्रेष्ठ कहानियों के संकलन “सीपियां” का विमोचन किया गया, वहीं “धनक-5” के किंडल संस्करण का लोकार्पण भी हुआ। पहले सत्र में डॉ. सत्यनारायण, विनोद भारद्वाज और मनीषा कुलश्रेष्ठ ने रघुनंदन त्रिवेदी की रचनात्मक विरासत पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में साहित्यकारों ने लेखन की बारीकियों पर विस्तृत संवाद किया।

गीत चतुर्वेदी ने फिक्शन लेखन में आंतरिक द्वंद्व को स्वीकारने की बात कही, जबकि जयप्रकाश पांडे और यतीन्द्र मिश्र ने कथेतर लेखन में भी ‘कहानीपन’ को जरूरी बताया। डॉ. विनय कुमार ने रचनात्मकता के लिए संघर्ष और संवेदना की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रभात रंजन ने भाषा के देसीपन को उसकी ताकत बताया। पंकज सुबीर और मनीषा कुलश्रेष्ठ ने कथानक को प्रभावी कहानी में ढालने की प्रक्रिया समझाई।

दूसरे दिन कला, अपराध कथा, अंतरराष्ट्रीय साहित्य, ग्राफिक नॉवेल और कहानी-उपन्यास के अंतर जैसे विषयों पर समृद्ध चर्चाएं हुईं। तीसरे दिन रघुनंदन त्रिवेदी की कहानी पर आधारित नाटक “एल्बम” का मंचन अरु व्यास के निर्देशन में हुआ, जिसमें स्वाति व्यास के अभिनय ने दर्शकों को प्रभावित किया।

अंतिम सत्रों में लेखन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पटकथा लेखन और ‘परकाया प्रवेश’ जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। फिल्म स्क्रिप्ट राइटर पुनीत शर्मा ने प्रतिभागियों को पटकथा लेखन के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया।

कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को मंच देकर उनकी रचनाओं पर चर्चा की गई तथा प्रमाण-पत्र वितरण के साथ कार्यशाला का सफल समापन हुआ।

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