जयपुर। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में श्री शिवकृपानंद स्वामी फाउंडेशन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय गुरु कृपा कथा के प्रथम दिन वक्ता मोहित भाई काचा ने कहा कि आत्म-जागृति, ध्यान और चित्त शुद्धि ही विश्व शांति का स्थायी मार्ग है। उन्होंने संदेश दिया—“अंधेरा कितना है यह मत देखो, बस स्वयं का दीया जला लो।”
काचा ने बताया कि ध्यान से व्यक्ति का आभामंडल सशक्त होता है, जिससे आंतरिक व बाह्य संतुलन बना रहता है। हिमालय ध्यान पद्धति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह विधि 72 देशों में प्रचलित है और आत्म-जागृति केवल सिद्ध गुरु के सानिध्य में ही संभव है।
उन्होंने कहा कि भौतिक सुविधाएं प्रयास से मिलती हैं, लेकिन वास्तविक सुख गुरु के मार्गदर्शन से प्राप्त होता है। कार्यक्रम में हिमालय मेडिटेशन प्रदर्शनी, ध्यान साधना और सभी धर्मों के लोगों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ सद्भाव का संदेश दिया गया।




















