निजीकरण के विरोध में रोडवेज कर्मियों का हल्ला बोल

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Roadways employees protest against privatization
Roadways employees protest against privatization

जयपुर। राजस्थान स्टेट रोडवेज एम्पलाईज यूनियन (एटक/एआईटीयूसी) के बैनर तले गुरुवार को रोडवेज मुख्यालय पर प्रदेश स्तरीय विशाल धरना-प्रदर्शन किया गया। इसमें एक हजार से अधिक सेवारत और सेवानिवृत्त कामगारों ने भाग लेते हुए “रोडवेज बचाओ-रोजगार बचाओ” के नारे लगाए। इससे पहले कर्मियों ने जयपुर डिपो से मुख्यालय तक रैली निकालकर विरोध जताया।

धरने को संबोधित करते हुए यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष एम.एल. यादव ने कहा कि एक समय रोडवेज में 25 हजार से अधिक कर्मचारी और 4500 से अधिक बसें थीं, जबकि अब यह संख्या घटकर करीब 10 हजार कर्मचारी और 2580 बसों तक सिमट गई है, जिनमें से 850 बसें अत्यंत पुरानी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारों की उपेक्षा के चलते रोडवेज को धीरे-धीरे निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है।

यादव ने बताया कि कर्मचारियों की भारी कमी के कारण ड्राइवर और कंडक्टर से 12 से 16 घंटे तक काम लिया जा रहा है, जबकि नियमानुसार 8 घंटे का कार्य निर्धारित है। इसके बावजूद उन्हें ओवरटाइम का भुगतान और साप्ताहिक अवकाश नहीं मिल रहा, जो श्रम कानूनों का उल्लंघन है।

यूनियन ने 15 हजार रिक्त पदों पर भर्ती और 2500 नई बसों की खरीद की मांग उठाई। साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाइट अलाउंस, ओवरड्यू और अन्य बकाया भुगतान को लेकर भी नाराजगी जताई, जो पिछले कई वर्षों से लंबित हैं।

महासचिव धर्मवीर चौधरी ने ग्रेड पे बढ़ाने, पदोन्नति के अवसर, महिला कर्मियों को चाइल्ड केयर लीव और वार्षिक अवकाश देने की मांग रखते हुए चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। धरने को हरगोविंद शर्मा, आनंद चौधरी, राजेंद्र सिंह सोलंकी, मदन गोपाल विश्नोई, अनिल कटारिया, बूटा सिंह और चंद्र सिंह भूकर ने भी संबोधित किया, जबकि अध्यक्षता प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कृष्ण गोपाल गुप्ता ने की।

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