दुर्लभ महासंयोग में मनी अक्षय तृतीया: मंदिरों में श्रद्धा और बाजारों में रही रौनक

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जयपुर। राजधानी जयपुर में सोमवार को अक्षय तृतीया का पर्व सर्वार्थ सिद्धि योग एवं रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ महासंयोग में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। उदियात तिथि के अनुसार श्रद्धालुओं ने प्रातः गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी एवं गौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और अक्षय पुण्य की कामना की।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए जप, तप, दान-पुण्य और शुभ कार्यों का फल कभी क्षय नहीं होता। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने कमल पुष्प, श्वेत पुष्प, कमलगट्टा, इत्र और खीर का भोग अर्पित करते हुए श्री सूक्त एवं कनकधारा स्तोत्र का पाठ किया। शहर के मंदिरों में दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चलता रहा।

अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर बाजारों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। सोना-चांदी के आभूषण, कांसा-पीतल के बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अचल संपत्ति की खरीदारी को लेकर लोगों में उत्साह रहा। ज्वेलरी दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी।

पंडित बनवारी लाल शर्मा के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग, अभिजीत मुहूर्त और चर-लाभ-अमृत मुहूर्त के संयोग ने इस दिन को नए कार्यों की शुरुआत और खरीदारी के लिए अत्यंत शुभ बना दिया। दान-पुण्य में भी लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं ने अन्न, वस्त्र, चना, ऋतुफल, मटका और भोजन सामग्री का वितरण किया, वहीं बेसहारा पशुओं के लिए चारा-पानी की व्यवस्था भी की गई।

अक्षय तृतीया पर स्वर्ण की विशेष महत्ता मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन सोना खरीदने से घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है और समृद्धि में वृद्धि होती है। ज्योतिष में विश्वास रखने वाले लोगों ने अपनी राशि के अनुसार भी खरीदारी की।

मेष राशि के जातकों ने मूंगा व धातु आभूषण, वृष ने चांदी, मिथुन ने अचल संपत्ति, कर्क ने मोती व धार्मिक वस्तुएं, सिंह ने स्वर्ण व तांबा, कन्या ने चांदी के सिक्के, तुला ने वाहन व इलेक्ट्रॉनिक सामान, वृश्चिक ने जल से जुड़ी वस्तुएं, धनु ने पीतल व धार्मिक ग्रंथ, मकर ने तांबा-पीतल, कुंभ ने चांदी व नीलम तथा मीन राशि के जातकों ने पीले वस्त्र व पात्रों की खरीदारी कर सुख-समृद्धि की कामना की।

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