जैसा हमारा चिंतन होता है,वैसी ही हमारी परिस्थितियां निर्मित होती है:प्रमेंद्र नाथ महाराज

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जयपुर। झोटवाड़ा रीको एरिया स्थित बड़ पीपली धाम में चल रहे 43 दिवसीय दुग्धाभिषेक अनुष्ठान के बाद श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महंत प्रमेंद्र नाथ महाराज ने कहा कि मनुष्य को सदैव सकारात्मक सोच रखनी चाहिए, क्योंकि जैसा हमारा चिंतन होता है, वैसी ही हमारी परिस्थितियां निर्मित होती हैं। श्रेष्ठ विचार जीवन में श्रेष्ठता को आकर्षित करते हैं और घर-परिवार में सुख-शांति का वातावरण बनाते हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक सुख और शांति बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि हमारे मन और मस्तिष्क में निहित है। इसके लिए अनावश्यक रूप से बाबाओं के पीछे भटकने की आवश्यकता नहीं है।

स्वच्छता को ईश्वर का प्रिय बताते हुए उन्होंने कहा कि जहां साफ-सफाई और पवित्रता होती है, वहीं भगवान का वास होता है। मन, विचार और शरीर में यदि अशुद्धि होगी तो वहां ईश्वर का निवास संभव नहीं है। प्रमेंद्र नाथ महाराज ने श्रद्धालुओं से घर का वातावरण सदैव पवित्र और सकारात्मक बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि समय-समय पर घर में गुग्गुल धूप देने से वातावरण शुद्ध होता है और समृद्धि बनी रहती है।

हनुमान चालीसा अवश्य पढ़े

साथ ही उन्होंने प्रतिदिन कम से कम एक बार हनुमान चालीसा का पाठ करने की प्रेरणा दी। विशेष रूप से बच्चों के लिए इसे आवश्यक बताते हुए कहा कि इससे उनकी बुद्धि का विकास होता है और वे मेधावी बनते हैं। उन्होंने कहा कि अध्यात्म के मार्ग में कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसके लिए निरंतर साधना और परिश्रम आवश्यक है।
धार्मिक आयोजनों में नाचना निषेध

धार्मिक आयोजनों में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा और सुंदरकांड जैसे कार्यक्रमों में नृत्य करना शास्त्रसम्मत नहीं है। ऐसे आयोजनों में शांत चित्त होकर श्रवण और मनन करना ही उचित है, तभी इष्ट देव की कृपा प्राप्त होती है।

धाम के प्रवक्ता विक्रम सिंह रुण्डल ने बताया कि बड़ पीपली धाम में प्रतिदिन 108 किलो दूध से अभिषेक किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। अभिषेक का दूध पशु-पक्षियों को पिलाया जाता है।

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