फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट से पंजीयन कराने वाले तीन डॉक्टर गिरफ्तार

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Three doctors arrested for registering using fake FMGE certificates.
Three doctors arrested for registering using fake FMGE certificates.

जयपुर। विदेश से एमबीबीएस करने के बाद भारत में चिकित्सकीय पंजीयन के लिए आवश्यक एफएमजीई स्क्रीनिंग परीक्षा के फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक 100 से अधिक संदिग्ध विदेशी मेडिकल स्नातकों की पहचान की जा चुकी है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि विदेश से एमबीबीएस करने के बाद भारत में चिकित्सकीय पंजीयन के लिए आवश्यक एफएमजीई स्क्रीनिंग परीक्षा के फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के मामले में एसओजी ने दीपक यादव (28) निवासी चौमूं जयपुर, राजू गुर्जर (28) निवासी रामबाग डीग – भरतपुर और नरेश गुर्जर (30) निवासी कठूमर जिला अलवर को गिरफ्तार किया है।

एसओजी की जांच में सामने आया कि दीपक यादव ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने के बाद कई बार एफएमजीई परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हुआ। इसके बाद उसने मुख्य आरोपी भानाराम माली के नेटवर्क के जरिए करीब 24 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाया और उसके आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज दौसा में इंटर्नशिप की।

इसी प्रकार राजू गुर्जर ने भी कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने के बाद एफएमजीई परीक्षा में सफलता नहीं मिलने पर 27 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार कराया तथा राजकीय मेडिकल कॉलेज हनुमानगढ़ में इंटर्नशिप की।

वहीं नरेश गुर्जर ने 23 लाख रुपये देकर फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट बनवाया और राजकीय मेडिकल कॉलेज अलवर में इंटर्नशिप की। जांच में यह भी सामने आया कि नरेश ने अन्य कई लोगों के लिए भी फर्जी एफएमजीई प्रमाण-पत्र बनवाने में भूमिका निभाई।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि पुलिस थाना एसओजी जयपुर में 4 फरवरी 2026 को दर्ज प्रकरण की जांच की जा रही है। जहां जांच में सामने आया कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले कुछ अभ्यर्थियों ने भारत में प्रैक्टिस के लिए अनिवार्य एफएमजीई परीक्षा पास नहीं की थी। लेकिन उन्होंने कूटरचित प्रमाण-पत्र बनवाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन करा लिया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी भानाराम माली के माध्यम से फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट तैयार कराए गए। इन प्रमाण-पत्रों के आधार पर कई विदेशी मेडिकल स्नातकों ने राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की तथा राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अस्थायी पंजीयन भी प्राप्त कर लिया। इस पूरे प्रकरण में मेडिकल काउंसिल के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। वही अब तक 100 से अधिक ऐसे व्यक्तियों को चिन्हित किया गया है, जिन्होंने फर्जी एफएमजीई प्रमाण-पत्र बनवाए थे।

उप महानिरीक्षक पुलिस (एसओजी) भुवन भूषण यादव ने बताया कि इस मामले में पूर्व में फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर इंटर्नशिप और पंजीयन कराने वाले 17 डॉक्टरों, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, मुख्य आरोपी भानाराम माली तथा एक दलाल को गिरफ्तार किया जा चुका है।

जांच में सामने आया है कि भानाराम माली प्रत्येक व्यक्ति से फर्जी प्रमाण-पत्र और मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के एवज में 20 से 30 लाख रुपये तक वसूलता था। एसओजी अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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