जयपुर। मां लक्ष्मी के आठों स्वरूप आदि लक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी के दर्शन करने अब दक्षिण भारत जाने की आवश्यक्ता नहीं रहेगी। अब छोटीकाशी में ही इनके दर्शन किए जा सकते हैं। खातीपुरा के जसवंत नगर में अष्ट महालक्ष्मी की प्राण प्रतिष्ठा की गई है।
दो दिवसीय अष्ट महालक्ष्मी प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव संयुक्त भारतीय धर्म संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य राजेश्वर महाराज सहित अन्य संत-महंतों के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। अष्ट महालक्ष्मी के साथ ही भगवान विष्णु और गणपति की भी प्राण प्रतिष्ठा की गई। इससे पूर्व सभी प्रतिमाओं के गंगाजल सहित विभिन्न तीर्थों के जल से शुद्धिकरण के बाद अनुष्ठान पूर्वक मंडलों के निर्माण किया। देवी- देवताओं के आह्वान के बाद सोडशोपचार पूजा-अर्चना की गई।
सभी प्रतिमाओं का धान्याधिवास पुष्पाधिवास, फलाधिवास, पत्राधिवास, घृताधिवास, औषधधिवास, हिरण्याधिवास, मिष्ठान्नाधिवास, रसाधिवास, जलाधिवास, शयनाधिवास की प्रक्रियाएं पूरी की गई। रात्रि में श्रीसूक्त पुरुष सूक्त, रुद्र सूक्त, कनकधारा स्तोत्र, मूल रामायण स्तोत्र के साथ हवन में आहुतियां दी गई। केवड़ा, गुलाब आदि सुगंधित द्रव्यों से युक्त जल से महास्नान कराकर मंगल कलश यात्रा के साथ नगर भ्रमण कराया गया।
इसके बाद मूर्तियों में प्राण आधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा की गई। 108 कमल पुष्पों सहित अन्य सुगंधित पुष्पों एवं द्रव्यों के साथ माताजी का श्रृंगार किया गया। हाथोज धाम के पीठाधीश्वर बालमुकुंदाचार्य महाराज, नहर के गणेश जी मंदिर के युवाचार्य मानव शर्मा, गीता गायत्री मंदिर के पं. राजकुमार चतुर्वेदी, संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ विनोद शास्त्री, सर्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं सुरेश मिश्रा, परकोटा गणेश मंदिर के महंत पं. अमित शर्मा, स्वामी निर्मलानंद जत्ती, आचार्य गोपाल शरण, वरिष्ठ अधिवक्ता एच सी गणेशिया, पं. मुकेश भारद्वाज, श्रीपाल शक्तावत, वरिष्ठ कलाविद रामू रामदेव सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



















