जयपुर। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की ‘योगिनी एकादशी’ इस बार जयपुर सहित देश भर में 10 और 11 जुलाई को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाई जाएगी। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत को सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से श्रीहरि की पूजा, व्रत, जप एवं दान-पुण्य करने से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात सभी पापों का नाश होता है।
पंडित राजेश शर्मा ने बताया कि पंचांग की गणना के अनुसार इस बार योगिनी एकादशी तिथि 10 जुलाई को प्रात: 8:18 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 11 जुलाई को प्रात: 5:23 बजे तक रहेगी। तिथि के इस उतार-चढ़ाव के कारण व्रत दो दिन रखा जाएगा।
10 जुलाई को स्मार्त संप्रदाय के श्रद्धालु एकादशी का व्रत रखेंगे। वहीं 11 जुलाई को आराध्य देव श्री गोविंद देवजी मंदिर सहित शहर के सभी प्रमुख वैष्णव मंदिरों में योगिनी एकादशी 11 जुलाई को मनाई जाएगी और इसी दिन वैष्णव समाज व्रत रखेगा। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, योगिनी एकादशी समस्त पापों को नष्ट करने वाली है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस एकमात्र व्रत को सच्चे मन से करने पर 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान महान पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
शर्मा के अनुसार एकादशी व्रत से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने व्रतियों के लिए पूजा की सरल विधि और नियम साझा किए हैं।
व्रती प्रात:काल स्नान के बाद स्वच्छ या पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीपक प्रज्ज्वलित कर प्रभु को चंदन, अक्षत, पुष्प एवं विशेष रूप से तुलसी दल अर्पित करें।
फल और मिष्ठान का भोग लगाकर विष्णु मंत्रों का जाप, योगिनी एकादशी व्रत कथा, विष्णु चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती के साथ पूजा संपन्न करें। पं. गौड़ ने श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर पर अन्न, फल, वस्त्र, जल से भरे घड़े (कलश) तथा जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था करने जैसे दान-पुण्य के कार्य करने का विशेष आह्वान किया है।



















