निकाय और पंचायत चुनाव टालने के लिए सरकार ने ओबीसी आयोग के गठन में देरी की : डोटासरा

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Government delayed the formation of the OBC Commission to postpone local body and Panchayat elections: Dotasra
Government delayed the formation of the OBC Commission to postpone local body and Panchayat elections: Dotasra

जयपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर पंचायत राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव जानबूझकर टालने का आरोप लगाया है। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार ने ओबीसी आयोग का गठन समय पर नहीं किया और अब भी आयोग को आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इससे स्थानीय निकायों के चुनाव अनावश्यक रूप से लंबित हैं।

डोटासरा ने कहा कि सरकार बनने के करीब 10 माह बाद, जब ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और कुछ नगर निकायों का कार्यकाल समाप्त हो चुका था और चुनाव लंबित थे, तब ओबीसी आयोग का गठन किया गया।

आयोग को तीन माह के भीतर ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों, जिला परिषदों और नगर निकायों के वार्डवार सर्वे के आधार पर ओबीसी आरक्षण संबंधी रिपोर्ट देनी थी, लेकिन 14-15 माह बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन का कार्य, जिसे चार माह में पूरा होना था, उसे भी करीब 13 माह तक खींचा गया। उनका कहना था कि यह सब स्थानीय निकाय चुनाव टालने की मंशा से किया गया।

डोटासरा ने कहा कि संविधान के 73वें और 74वें संशोधन तथा अनुच्छेद 243ई और 243यू के तहत पंचायत राज संस्थाओं और नगर निकायों का कार्यकाल पूरा होते ही समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि उच्च न्यायालय भी चुनाव कराने के निर्देश दे चुका है, लेकिन राज्य सरकार अब तक चुनाव की घोषणा नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग लगातार सरकार को चुनाव कराने के लिए पत्र लिख रहा है, लेकिन सरकार न तो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आवश्यक डेटा उपलब्ध करा रही है और न ही आयोग के पत्रों का जवाब दे रही है।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने ओबीसी आयोग को कार्यालय, कंप्यूटर और पर्याप्त कर्मचारी तक उपलब्ध नहीं कराए। उनका कहना था कि आयोग को संसाधन नहीं देना भी चुनाव टालने की रणनीति का हिस्सा है।

डोटासरा ने ओबीसी आयोग की ओर से शुरू किए गए ‘राजधारा ऐप’ की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि ऐप में दो विकल्प—’गवर्नमेंट’ और ‘सिटीजन’—दिए गए हैं। उनके अनुसार सरकारी प्रगणकों और बीएलओ के माध्यम से डेटा संग्रह की व्यवस्था अधिक प्रमाणिक होती, क्योंकि उसकी जवाबदेही संबंधित अधिकारी की होती है, लेकिन सरकार ने ‘गवर्नमेंट’ विकल्प को लॉक कर केवल ‘सिटीजन’ विकल्प सक्रिय रखा है।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति ओटीपी के माध्यम से स्वयं जानकारी दर्ज कर सकता है। ऐसे में यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि दर्ज की गई जानकारी सही और प्रमाणिक है। उनका आरोप था कि इस प्रकार तैयार किया गया डेटा कानूनी रूप से भी सवालों के घेरे में रहेगा।

डोटासरा ने कहा कि सरकार को ओबीसी वर्ग का सर्वे जिम्मेदारीपूर्वक सरकारी तंत्र के माध्यम से कराना चाहिए और प्रमाणिक आंकड़ों के आधार पर आरक्षण तय कर जल्द से जल्द नगर निकाय एवं पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव घोषित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ओबीसी वर्ग के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगी।

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