जयपुर। आषाढ़ मास की अमावस्या इस वर्ष मंगलवार, 14 जुलाई को पड़ रही है। मंगलवार के दिन अमावस्या होने से यह भौमवती अमावस्या कहलाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संयोग पितृ दोष निवारण, मानसिक शांति, धन प्राप्ति तथा मंगल दोष शमन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन स्नान, दान, पितृ तर्पण और भगवान शिव व हनुमानजी की पूजा का विशेष महत्व रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पं. गौरी शंकर शर्मा के अनुसार भौमवती अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान करना श्रेष्ठ माना गया है। यदि नदी स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। मान्यता है कि इससे पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने बताया कि अमावस्या तिथि दोपहर लगभग 3:15 बजे तक रहेगी। वहीं सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:12 बजे तक स्नान-दान के लिए विशेष शुभ समय माना गया है।
पितृ तर्पण और दान का विशेष महत्व
गरुड़ पुराण एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है तथा परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। विद्वानों का मानना है कि भौमवती अमावस्या पितृ दोष और मंगल दोष के निवारण के लिए विशेष फलदायी होती है।
राशि अनुसार दान
मेष और वृश्चिक राशि के जातक मसूर की दाल, गुड़ और तांबे का दान करें। मकर और कुंभ राशि के जातक काले तिल तथा जूते-चप्पलों का दान करें।
हनुमान और शिव पूजा का रहेगा विशेष महत्व
मंगलवार होने के कारण इस दिन हनुमानजी की पूजा, सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। वहीं भगवान शिव का अभिषेक एवं पूजा-अर्चना करने से मंगल दोष, ऋण बाधा और जीवन की परेशानियों से राहत मिलने की मान्यता है।
इन कार्यों से करें परहेज
शास्त्रों के अनुसार भौमवती अमावस्या के दिन भोजन में संयम रखें तथा अनावश्यक विवाद, क्रोध और बाल कटवाने जैसे कार्यों से बचें। सूर्योदय से तिथि समाप्ति तक जप, तप, दान और श्राद्ध कर्म करना शुभ माना गया है। इस दिन किए गए धार्मिक उपाय नौकरी, विवाह, धन, स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए लाभकारी माने जाते हैं।



















