जयपुर। विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के वरिष्ठ पेट, आंत एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेन्द्र सुल्तानिया ने कहा कि हेपेटाइटिस-बी और सी का संक्रमण लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के रह सकता है और धीरे-धीरे लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने बताया कि समय पर एक साधारण ब्लड टेस्ट से बीमारी की पहचान कर प्रभावी उपचार शुरू किया जा सकता है, जिससे लिवर सिरोसिस, लिवर फेल्योर और लिवर कैंसर जैसी जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस-सी के अधिकांश मामलों का सफल इलाज संभव है, जबकि हेपेटाइटिस-बी के मरीज नियमित उपचार और चिकित्सकीय निगरानी में सामान्य जीवन जी सकते हैं। डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल हेपेटाइटिस रिपोर्ट-2026 के अनुसार प्रतिदिन 4,900 से अधिक लोग हेपेटाइटिस-बी या सी से संक्रमित होते हैं और दुनिया में 28.7 करोड़ लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस से प्रभावित हैं। भारत में भी हेपेटाइटिस-बी का बोझ अधिक है।
डॉ. सुल्तानिया ने कहा कि हेपेटाइटिस केवल शराब पीने वालों की बीमारी नहीं है। यह संक्रमित रक्त, असुरक्षित इंजेक्शन, बिना जांच किए गए रक्त, संक्रमित चिकित्सा उपकरणों और संक्रमित मां से नवजात में भी फैल सकता है। उन्होंने पुरानी लिवर बीमारी, परिवार में हेपेटाइटिस का इतिहास, रक्त चढ़ने या रक्त के संपर्क में आने वाले लोगों को जांच कराने की सलाह देते हुए कहा कि जागरूकता, समय पर स्क्रीनिंग और उचित उपचार ही हेपेटाइटिस से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।



















