जयपुर। नारायणा हॉस्पिटल जयपुर के अतिरिक्त निदेशक-हृदय रोग विभाग डॉ. अंशु काबरा ने कजाकिस्तान के अस्ताना स्थित यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर से हृदय की संरचनात्मक बीमारियों के उपचार की विशेषज्ञता संबंधी फेलोशिप सफलतापूर्वक पूरी की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस फेलोशिप के दौरान उन्होंने हृदय की जटिल बीमारियों के आधुनिक और कम चीर-फाड़ वाले उपचार की नई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
हृदय की संरचनात्मक बीमारियां
हृदय की संरचनात्मक बीमारियों में हृदय के वाल्व, हृदय की बनावट या उसके कुछ हिस्सों से जुड़ी विभिन्न समस्याएं शामिल होती हैं। ऐसे मरीजों में लंबे समय तक सांस फूलना, जल्दी थकान होना और रोजमर्रा के कार्य करने में परेशानी जैसी शिकायतें हो सकती हैं। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के जरिए कुछ मरीजों का उपचार खुले हृदय की सर्जरी के बिना भी संभव है।
इन आधुनिक तकनीकों का लिया प्रशिक्षण
फेलोशिप के दौरान डॉ. काबरा ने कैथेटर के जरिए महाधमनी के खराब वाल्व को बदलने, कैथेटर के जरिए माइट्रल वाल्व प्रत्यारोपित करने, हृदय में जन्मजात छेद को विशेष उपकरण के जरिए बंद करने और भोजन नली के रास्ते त्रि-आयामी हृदय की इको जांच जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया।
इनमें कई उपचार कैथेटर के जरिए किए जाते हैं और मरीज के शरीर में बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं होती। इससे उपयुक्त मरीजों में कम दर्द, अपेक्षाकृत जल्दी स्वस्थ होने और कई मामलों में अस्पताल में कम समय तक रुकने जैसे लाभ मिल सकते हैं।
डॉ. अंशु काबरा ने कहा कि हृदय की संरचनात्मक बीमारियों के उपचार में लगातार नई तकनीकें सामने आ रही हैं। फेलोशिप के दौरान उन्हें इन आधुनिक तकनीकों को करीब से सीखने और जटिल मामलों को समझने का अवसर मिला। उनका प्रयास रहेगा कि फेलोशिप से मिले ज्ञान और अनुभव का लाभ राजस्थान के मरीजों को मिले और उन्हें आधुनिक एवं कम चीर-फाड़ वाले उपचार की सुविधाएं जयपुर में ही उपलब्ध हो सकें।
डॉ. काबरा ने फेलोशिप के दौरान मार्गदर्शन के लिए डॉ. अब्दुराशिद, डॉ. यूरी पिया, डॉ. येरकेझान, डॉ. नूरसुल्तान और डॉ. मुराद का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस अवसर के लिए नारायणा हॉस्पिटल प्रबंधन, अपने सहयोगियों, दोस्तों और परिवार को भी धन्यवाद दिया।
डॉ. काबरा की इस अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप से नारायणा हॉस्पिटल जयपुर में हृदय की संरचनात्मक बीमारियों के आधुनिक उपचार की सुविधाओं को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। इससे जटिल हृदय रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए आधुनिक और कम चीर-फाड़ वाले उपचार विकल्पों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।



















