सावन के तीसरे सोमवार पर शिवमय हुई छोटी काशी

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'Chhoti Kashi' immersed in devotion to Lord Shiva on the third Monday of Sawan.
'Chhoti Kashi' immersed in devotion to Lord Shiva on the third Monday of Sawan.

जयपुर। सावन के तीसरे सोमवार को गुलाबी नगरी ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठी। बादलों से घिरे सुहावने मौसम के बीच अलसुबह से ही शहर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। ताड़केश्वर महादेव, झारखंड महादेव, आत्माराम जलेश्वर महादेव, अमरपुरेश्वर महादेव और नर्मदेश्वर महादेव सहित छोटे-बड़े शिव मंदिरों में दिनभर अभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, विशेष शृंगार और आरती के आयोजन हुए। भक्तों ने दूध, गंगाजल, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और फलों के रस से भगवान शिव का अभिषेक कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की।

हर की पौड़ी से दो टैंकर गंगाजल, सुबह 5 से शाम 4 बजे तक अभिषेक

वैशाली नगर स्थित प्रसिद्ध झारखंड महादेव मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार का सबसे बड़ा आकर्षण हरिद्वार की हर की पौड़ी से मंगवाया गया गंगाजल रहा। श्री बब्बू सेठ मेमोरियल ट्रस्ट और श्री धर्म फाउंडेशन की ओर से दो टैंकर गंगाजल जयपुर मंगवाया गया। ट्रस्ट अध्यक्ष जयप्रकाश सोमानी ने बताया कि गुरुवार को दो ट्रक हरिद्वार रवाना किए गए थे, जो शनिवार को गंगाजल लेकर जयपुर पहुंचे।

सोमवार सुबह करीब 5 बजे महाशिवाभिषेक शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चला। हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगाजल भगवान झारखंड महादेव को अर्पित किया। कई श्रद्धालु अपने पात्रों में गंगाजल भरकर घर भी ले गए। आयोजन का उद्देश्य अधिकाधिक भक्तों को गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करने का अवसर देना रहा। महाशिवाभिषेक के पोस्टर का विमोचन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया था।

36 घंटे पैदल चले कांवड़िए,300 श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

शिव शक्ति मंडली जयपुर की ओर से हरिद्वार से लाई गई कांवड़ भी तीसरे सोमवार को जयपुर पहुंची। गोनेर रोड निवासी समाजसेवी अशोक जांगिड़ ने बताया कि मंडली के सदस्य 13 अगस्त को जयपुर से हरिद्वार रवाना हुए और 14 अगस्त दोपहर करीब 3 बजे हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर कांवड़ उठाई। करीब 40 कांवड़ियों ने 36 घंटे की कठिन पैदल यात्रा पूरी की।

रास्ते में बहरोड़ में कांवड़ियों के विश्राम और अल्पाहार की व्यवस्था की गई। 16 अगस्त को जयपुर पहुंचने पर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से वातावरण शिवमय हो गया। इसके बाद करीब 300 श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया।

पहली बार मानसरोवर में बाल गोपाल कांवड़ यात्रा

मानसरोवर में इस बार आस्था के साथ देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। ‘नए सपने नई उड़ान’ और ‘राधा सखी महिला ग्रुप’ के संयुक्त तत्वावधान में पहली बार बाल गोपाल कांवड़ यात्रा निकाली गई। पछपनेश्वर महादेव मंदिर से शुरू हुई यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए सर्वेश्वर महादेव मंदिर पहुंची।

यात्रा में 5 से 18 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। बच्चों ने कंधों पर कांवड़ उठाई तो महिलाओं और पुरुषों ने हाथों में तिरंगा थामकर सनातन आस्था के साथ राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। ज्योति शर्मा, ललित गर्ग, भंवर कंवर, रुक्मिणी देवी, ममता गुप्ता, हरीश मेहता और शालिनी ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अमरपुरेश्वर-नर्मदेश्वर महादेव का विशेष अभिषेक

अमरापुर स्थान पर सुबह 6 से 6.40 बजे तक श्री अमरपुरेश्वर महादेव का पंचामृत, बिल्वपत्र, गोदूध और गंगाजल से महाभिषेक हुआ। इसके बाद पूजा और आरती की गई। जवाहर नगर सेक्टर-5 स्थित झूलेलाल मंदिर में नर्मदेश्वर महादेव का पूज्य स्वामी मोहन प्रकाश महाराज और संत मंडल के सान्निध्य में पंचामृत, घी, शहद, बूरा, गोदूध और फलों के रस से अभिषेक किया गया। भगवान को 108 कमल पुष्प अर्पित किए गए। वहीं नाग पंचमी के अवसर पर नाग देवता की पूजा के साथ सिंधी समाज का गोगाड़ा पर्व भी भक्तिभाव से मनाया गया।

लहरिया उत्सव में गूंजे सावन के गीत

दिल्ली रोड स्थित बंगाली बाबा गणेश मंदिर परिसर के आत्माराम जलेश्वर महादेव मंदिर में भोले बाबा की आकर्षक झांकी सजाई गई। दूध, दही और भांग आदि से अभिषेक के बाद अमृत भजन संध्या हुई। महिलाओं ने लहरिया उत्सव के तहत सावन के गीत गाए और भजनों से भोलेनाथ को रिझाया। नीरज अग्रवाल, ब्रजकिशोर, पवन शारा, सुनील विजय, प्रवीण, मुरली और सुरेश पंचाल सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

शहरभर में सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम

प्रमुख शिवालयों में उमड़ी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, पार्किंग और कतार व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए। मंदिर समितियों और सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन एवं जलाभिषेक कराने में सहयोग किया। शाम को विभिन्न मंदिरों में महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ धार्मिक आयोजनों का समापन हुआ।

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