जयपुर। महर्षि सद्गुरु स्वामी सर्वानंद महाराज के 49वें महानिर्वाण दिवस पर श्री अमरापुर स्थान में पंच दिवसीय वर्सी उत्सव भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पवित्र समाधि स्थल पर हजारों श्रद्धालुओं ने शीश नवाकर पुष्प अर्पित किए और आशीर्वाद लिया। उत्सव के समापन पर विशाल आम भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी ग्रहण की।
सुबह 7 से 11 बजे तक नित्य नियम प्रार्थना, संत-महात्माओं के भजन-सत्संग, प्रवचन, प्रवचन कैसेट श्रवण और आरती सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए। स्वामी मोहन प्रकाश महाराज एवं स्वामी मनोहर लाल महाराज ने प्रवचन में कहा कि संत-महापुरुषों का जन्म जीव कल्याण के लिए होता है। संत नाम का जाप करते-करते स्वयं भगवान के स्वरूप बन जाते हैं।
महानिर्वाण दिवस के अवसर पर श्री अमरापुर स्थान के मंदिर और समाधि स्थल को ऋतु पुष्पों से आकर्षक ढंग से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा प्रकट की। महिला मंडल, नवयुवक मंडल और सेवा मंडली के सदस्यों ने दिनभर निष्काम सेवा की। श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी तैयार करने से लेकर सब्जी काटने, फुलके बनाने, बर्तन धोने और जल सेवा तक में सेवादार जुटे रहे।
संतों ने बताया कि करीब 70-75 वर्ष पूर्व विभाजन के समय स्वामी सर्वानंद महाराज भारत आए और जयपुर में श्री अमरापुर स्थान का निर्माण कराया। यहां सद्गुरु स्वामी टेऊंराम महाराज और स्वामी सर्वानंद महाराज के पवित्र समाधि स्थल हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और नाम जप के लिए पहुंचते हैं।
स्वामी सर्वानंद महाराज ने सद्गुरु स्वामी टेऊंराम महाराज की आध्यात्मिक वाणी को संजोकर ‘प्रेम प्रकाश ग्रंथ’ का निर्माण किया, जिसमें दोहे, पद, छंद, भजन और कविताएं शामिल हैं। ग्रंथ का नियमित पाठ किया जाता है।



















